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“एक तू सच्चा, तेरा नाम सच्चा” — बाबा फुलसन्दे वालों ने बताया जीवन का वास्तविक आधार
“एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा” ईश्वरी मंत्र के दृष्टा ऋषि सत्पुरुष बाबा फुलसन्दे वालों ने कहा कि “परमेश्वर नमस्तुभ्यं “,”आदि ब्रह्म नमस्तुभ्यं”, ” नारायण नमस्तुभ्यं”, “अक्षरम परम ब्रह्म नमस्तुभ्यं अर्थात हे आदि पुरुष आज पुरुष तेरी यादों की चादर ओढ़े मेरी जिंदगी गुजरती है, तेरे कदमों की हर आहट मेरे सीने से गुजरती है। छह तत्व की देह बनी , मृत्यु इसको गिरा देती हैं। सत्पुरुष यहां रामनगर के पैलेस में आयोजित त्रिदिवसीय दिव्य सत्संग के दूसरे दिन उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि छठे तत्व की साधना व्यक्ति को अजर अमर बना देती हैं ,छठा तत्व ब्रह्म तत्व है जो अपने आप में अविनाशी है इस शरीर के नष्ट हो जाने पर भी वह नष्ट नहीं होता है।जिसने नियम धर्म न माना वे नर मिट्टी में मिल गए। सोच समझकर जो चले, वे परम ब्रह्म से मिल गए। बाबा ने कहा कि संन्यासी हो तो शिवपुत्र कार्तिकेय के जैसा हो वरना संन्यास की तरफ पैर न रखें। जिस दुनिया को तूने त्याग दिया फिर उसपे अपनी पर अपनी नज़र ना रख ,जीवन को संतुलित करना ही धर्म आचरण कहलाता है ,नियम संयम जो ना माने वह नष्ट भ्रष्ट हो जाता है। उन्होंने कहा कि जिसने भी ब्रह्म रूप गुरु के चरणों में बैठकर अपनी क्षय माला जपी। तब सद्गुरु ने सर पर हाथ धरा ,तब तन मन में उजाला हो जाता है। बाबा ने कहा कि सब कुछ प्रभु के हाथ में है परंतु सद्गति और दुर्गति इंसान के अपने हाथ में हैं। दिव्य































