सड़क पर पड़े बेसहारा बुजुर्गो को उठा लाती है सड़क से दर-दर भटक रहे बेसहारा बीमार बाबा का सहारा बनी क्रांतिकारी शालू सैनी* -कलयुगी भतीजे ने चाचा की सारी जमीन अपने नाम कराकर चाचा को घर से निकाला, तो क्रांतिकारी शालू सैनी बनी बुढापे की लाठी बीमार बाबा को कराया हॉस्पिटल में एडमिट करेगी खुद से सेवा

मुजफ्फरनगर। कलयुगी भतीजे ने अपने चाचा को घर से निकाल दिया। बूढ़ा चाचा बीमार हालत में भूख प्यास से बेहाल दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर हो रहे थे।वहीं भूखी प्यासी पापी पेट को भरने के लिए लोगों के सामने हाथ फैलाने को मजबूर हो गए
लावारिसों की वारिस के नाम से जाने जाने वाली समाज सेविका क्रांतिकारी शालू सैनी ने खास बातचीत में बताया कि क्रांतिकारी शालू सैनी को किसी अंजान व्यक्ति ने दूरभाष के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि रेलवे स्टेशन पर एक बीमार बेसहारा बुजुर्ग बाबा जमीन में बेहद ही बुरी हालत में पड़े रो रहे है , जानकारी के बाद क्रांतिकारी शालू सैनी मौके पर पहुंची और बूढ़े बाबा के बुढापे की लाठी बन अपने धर्म के बाबा बनाकर अपने साथ हॉस्पिटल ले आई जहां उनका इलाज कराकर वो खुद उनकी सेवा करेगी इस बीच क्रांतिकारी शालू सैनी को ढेर सारी दुआएं देते हुए अपनी धर्म की बेटी के रूप में क्रांतिकारी शालू सैनी के सर पर ममता का आंचल औढा दिया।

