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मुर्दों से प्रेम निभाने वाली क्रांतिकारी शालू सैनी कर चुकी है 6000 हजार से ज्यादा अंतिम संस्कार ज्येष्ठ अमावस्या पर किया करीब 500 अस्थियों का विसर्जन*

कहते हैं कि जिसका कोई नहीं होता, उसका भगवान होता है। लेकिन धरातल पर इस बात को सच कर दिखाया है मुजफ्फरनगर की ‘क्रांतिकारी’ शालू सैनी ने। साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष क्रांतिकारी शालू सैनी, जो पिछले लंबे समय से लावारिस व बेसहारा लाशों के ससम्मान अंतिम संस्कार के लिए देश भर में अपनी एक अलग पहचान बना चुकी हैं, क्रांतिकारी शालू सैनी ने मानवता की एक अटूट मिसाल पेश की है।

​ज्येष्ठ मास की पावन अमावस्या के पवित्र अवसर पर, शालू सैनी ने तीर्थ नगरी हरिद्वार के सती घाट पर पूरे विधि-विधान, सनातन परंपरा और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ करीब 500 लावारिस व बेसहारा शवों का अस्थि विसर्जन किया।

​यह दृश्य अत्यंत भावुक और आंखें नम कर देने वाला था, जब शालू सैनी मां गंगा की गोद में उन सैकड़ों आत्माओं के मोक्ष की प्रार्थना कर रही थीं, जिन्हें जीते जी शायद अपनों का साथ न मिला, लेकिन मौत के बाद शालू सैनी ने एक बेटी, एक बहन और एक मां का फर्ज निभाते हुए उन्हें मोक्ष की राह दिखाई।

अस्थि विसर्जन के इस पुनीत कार्य को संपन्न करने के बाद बेहद भावुक स्वर में शालू सैनी ने कहा:

​”दुनिया के लिए ये लावारिस लाशें या बेसहारा अस्थियां हो सकती हैं, लेकिन मेरे लिए ये मेरे अपने हैं। जब समाज इन्हें छोड़ देता है, तो ईश्वर मुझे इन्हें संभालने की जिम्मेदारी देता है। लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करना और उनकी अस्थियों को पूरे सम्मान के साथ गंगा जी में विसर्जित करना मेरे लिए कोई सामाजिक कार्य नहीं है, बल्कि यह मेरी आत्मा की सेवा और ईश्वर के प्रति मेरा अटूट संकल्प है।”

​शालू सैनी ने बताया कि । ज्येष्ठ अमावस्या के विशेष महत्व को देखते हुए वे इन अस्थि कलशों को लेकर हरिद्वार पहुंचीं। घाट पर तीर्थ पुरोहितों के सानिध्य में बकायदा पिंड दान, तर्पण और विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद पूरे सम्मान के साथ सभी अस्थियों को गंगा नदी की अविरल धारा में प्रवाहित किया गया, ताकि इन भटकी हुई और अज्ञात आत्माओं को परम शांति और मोक्ष की प्राप्ति हो सके।

क्रांतिकारी ​शालू सैनी का यह सेवा भाव आज के दौर में स्वार्थ से परे हटकर नि:स्वार्थ मानवता का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने समाज को यह संदेश दिया है कि हर इंसान सम्मान के साथ विदाई का हकदार है। उनके इस साहसिक और अत्यंत भावुक सेवा की हरिद्वार के स्थानीय तीर्थ पुरोहितों, श्रद्धालुओं और मुजफ्फरनगर के प्रबुद्ध नागरिकों ने भूरी-भूरी प्रशंसा की है।

​केक्रांतिकारी शालू सैनी का यह संकल्प आगे भी इसी तरह जारी रहेगा, ताकि कोई भी लावारिस व बेसहारा आत्मा सम्मानजनक अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन से वंचित न रहे।शालू ने सभी से निवेदन भी किया है कि इस पुण्य सेवा में उनका सहयोग जरूर करे लकड़ी घी कफन सामग्री एम्बुलेंस गाड़ी से 8273189764 फोन पे इस नम्बर पर जानकारी के लिए भी संपर्क कर सकते है और इच्छा अनुसार योगदान भी कर सकते हैं

Samarth Bharat News

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