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स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष डॉ०अतुल कृष्णा की पुस्तिका राष्ट्र अनुभूति भाग-२ का हुआ प्रकाशन,संयुक्त भारत गणराज्य की की परिकल्पना

रुड़की।मेरठ स्थित स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी के मुख्य सलाहकार/चेयरमैन डॉ०अतुल कृष्णा ने कहा कि यदि हमें हर क्षेत्र में दुनिया की महाशक्तियों से आगे निकलना है,तो सँयुक्त भारत गणराज्य की परिकल्पना को धरातल पर साकार रूप देना होगा।उन्होंने कहा कि राजनीतिक लोग अखण्ड भारत की बात करते हैं,मगर उसका वास्तविक प्रारूप उनके पास नहीं है।डॉ०कृष्णा ने अपनी पुस्तक “राष्ट्र अनुभूति” भाग-2 की प्रकाशन अवलोकन विचार गोष्ठी के अवसर पर शहीद अशफाक उल्लाह खान भवन में विशेष वक्ता के रूप में बोलते हुए कहा कि यदि मजबूत इच्छा शक्ति,ईमानदारी के साथ हमारे देश के राजनेता सँयुक्त अरब अमीरात की तर्ज पर विशाल रूप में संयुक्त भारत गणराज्य के निर्माण के विषय में पड़ोसी देशों से विचार विमर्श करें,तो इससे सभी को लाभ मिलेगा और भारत विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति बन सकता है।उन्होंने कहा कि श्रीलंका,पाकिस्तान,नेपाल,बर्मा,बांग्लादेश आदि देश इस गणराज्य का हिस्सा बन सकते हैं,जिसमें सबकी एक सेना,एक करेंसी और एक पासपोर्ट हो।सबको अपने-अपने सम्प्रदाय और धर्म की नीतियां अपने समाज के अनुकूल बनाने की आजादी होगी,इससे आपसी तनाव व भेदभाव भी कम हो जाएगा।लोकसभा की डिप्टी डायरेक्टर व सामाजिक समरसता अभियान से जुड़ी वक्ता नमिता कुमारी ने कहा कि डा०अतुल कृष्णा की विचारधारा और विशाल सोच से शैक्षिक उन्नति और राष्ट्र निर्माण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश को अभूतपूर्व लाभ मिला है।उन्होंने कहा कि उनकी प्रेरणादायक नीतियों का लाभ यदि शासकीय स्तर पर लिया जाए तो देश की जनता और अधिक लाभान्वित हो सकेगी।इस अवसर पर उत्तराखंड सरकार उर्दू अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष व अंतरराष्ट्रीय शायर अफजल मंगलौरी ने कहा कि डॉ०अतुल कृष्णा का व्यक्तित्व शिक्षा,स्वास्थ व चरित्र निर्माण की ऐसी जीवंत पाठशाला है,जो अनेक विश्विद्यालयों पर भारी है।अफजल मंगलौरी ने कहा कि गौतम बुद्ध,भगवान महावीर,श्री कृष्ण,मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम,बाबा गुरु नानक और सूफी-संतों की शिक्षाओं और आदर्शों का प्रतिबिंब डॉ०अतुल कृष्णा के विचारों और नीतियों में देखने को मिलता है।उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के सेनानियों को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से उनकी पुस्तकें और शैक्षिक भवन आज हम सब के लिए प्रेरणा के स्रोत्र हैं।

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