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उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने जसवावाला गांव को बनाया ज्ञान एवं विकास का केंद्र 

धनौरी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के रुड़की क्षेत्रीय केंद्र द्वारा गोद लिए गए ग्राम जसवावाला में मंगलवार को पंचायत घर में एक विशाल जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम प्रधान कु प्रीति ने की। कार्यक्रम में सैकड़ों ग्रामीणों, युवाओं एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम के शुभारंभ पर ग्राम प्रधान कु. प्रीति तथा पूर्व ग्राम प्रधानों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ. बृजेश बनकोटी ने विश्वविद्यालय की “गोद लिए गए गांव” की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास एवं सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों एवं सर्वेक्षणों का संचालन करेगा। उन्होंने कहा कि “शिक्षा हर समस्या और हर मुसीबत का सबसे प्रभावी समाधान है। शिक्षित समाज ही समृद्ध और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण करता है।”

विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. आशुतोष भट्ट ने ग्रामीण युवाओं को व्यावसायिक प्रमाणपत्र एवं डिग्री पाठ्यक्रमों की जानकारी देते हुए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कौशल आधारित शिक्षा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है।

डॉ. ललित मोहन पंत एवं डॉ. वीरेंद्र कुमार ने विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही उन्होंने किसानों को उन्नत बीजों, आधुनिक कृषि तकनीकों एवं वैज्ञानिक खेती के माध्यम से बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के उपाय बताए।

हरिओम सरस्वती पीजी कॉलेज धनौरी के प्राचार्य डॉ. मुनेंद्र सिंह ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के इस अभिनव प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने ग्रामीणों से शिक्षा एवं सामाजिक उन्नति के लिए आगे आने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. छवि त्यागी ने मुक्त शिक्षा प्रणाली की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “शिक्षा प्राप्त करने की कोई आयु सीमा नहीं होती। कोई भी व्यक्ति किसी भी उम्र में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण कर अपने सपनों को साकार कर सकता है।”

कार्यक्रम के अंत में ग्राम प्रधान कु. प्रीति ने सभी अतिथियों, विश्वविद्यालय परिवार एवं ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी इस प्रकार के जनहितकारी आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर एक विशाल पुस्तक मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों एवं विद्यार्थियों को 400 से अधिक पुस्तकें निशुल्क वितरित की गईं। पुस्तक मेले को ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह के साथ सराहा।

कार्यक्रम में डॉ.योगेश योगी जी,पूर्व प्रधान देशराज, राजपाल, सीटू सिंह, साधूराम सैनी, डॉ. संध्या त्यागी, डॉ. रविन्द्र सिंह, डॉ. मोहित शर्मा, मोनू कुमार, मंसूर अहमद सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, छात्र-छात्राएं एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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