
रुड़की।ज्योतिष गुरुकुलम,रुड़की में आयोजित श्रीशिव महापुराण कथा के पंचम दिवस पर कथा व्यास आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि कलयुग में भगवान शिव की भक्ति मनुष्य को विशेष शांति प्रदान करने वाली है।आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने कहा कि कलयुग में मनुष्य के जीवन में झूठ,कपट,मोह और अनेक प्रकार के विकार बढ़ते जा रहे हैं।ऐसे समय में श्रीशिव महापुराण कथा का श्रवण एवं भगवान शिव की सच्ची निष्ठा से भक्ति,मन को शुद्ध करने और जीवन में सकारात्मकता एवं शांति लाने का श्रेष्ठ माध्यम है।उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि भगवान की भक्ति दिखावे के लिए नहीं,बल्कि सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि श्रीशिव महापुराण कथा


धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष ये चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।भगवान शिव की आराधना से मनुष्य को आध्यात्मिक शक्ति,आत्मिक शांति और जीवन में सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त होती है।कथा के पंचम दिवस आचार्य ने माता सती के चरित्र,भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का विस्तारपूर्वक वर्णन किया,इसके साथ ही उन्होंने भगवान गणेश एवं भगवान कार्तिकेय के जन्म की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भगवान शिव के परिवार की दिव्यता एवं सनातन धर्म में उनके महत्व से परिचित कराया।कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से श्रीशिव महापुराण का श्रवण किया।पूरा कथा स्थल हर-हर महादेव और भगवान शिव के जयघोष से गूंज उठा।आचार्य रमेश सेमवाल महाराज ने कहा कि श्रीशिव महापुराण केवल कथा नहीं,बल्कि मानव जीवन को धर्म,संस्कार,भक्ति और सदाचार का मार्ग दिखाने वाला दिव्य ग्रंथ है।प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में भगवान शिव की भक्ति,सत्य और सदाचार को अपनाना चाहिए।इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।



















