
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा ईश्वरीय मंत्र के दृष्टा ऋषि सत्पुरुष बाबा फुलसंदे वालों ने कहा कि मेरे राष्ट्र का प्रत्येक व्यक्ति आत्मा से तपस्वी व शरीर से मजबूत सैनिक बने ताकि वह अपने देश, धर्म, संस्कृति की प्राणपन से सेवा कर सकें। प्रत्येक भारतवासी को राष्ट्र प्रथम मंत्र आत्मसात करना चाहिए ,तभी देश व देशवासियों का भला होगा।

सतपुरुष यहां रामनगर में आयोजित त्रिदिवसीय दिव्य सत्संग के समापन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संसार की रीति है कि फलों से लदे हुए पेड़ों को ही लोग पत्थर मारते हैं। सूखकर जो वृक्ष ठूंठ से रह गए उन्हें पंछी भी छोड़ जाते हैं यहां लोगों ने बाग उजाड़ने सीखे, आग लगाना सीखा है। सच यह है कि निर्मल हृदय वालों पर बस दाग लगाना सीखा है।
बाबा ने कहा कि , उल्लू और शैतान एक जैसे होते हैं जो ईश्वर के सेवकों को उजाड़ने का पाप करते हैं जबकि “हुमा” परिंदा इंसानों को सुल्तान/ राजा बनाकर संवार देता है। यह सच है कि जो उल्लू के संग बैठेगा उल्लू ही हो जाएगा, जो प्रभु के मित्रों के संग करता है वह वैसा ही बन जाता है। उन्होंने कहा कि जो भोजन भंडारी बाटते हैं क्या उन्हें भूख नहीं लगती, क्या वैद्य हकीम को कभी कोई बीमारी नहीं लगती।
बाबा ने कहा कि ब्रह्म रूप गुरु मेरा शिव जैसा है ,सेवक, कार्तिकेय नंदी जैसा होता है परम ब्रह्म की ज्योति में चमकते जाते हैं सितारों जैसे योगी संभल संभल कर चलता है, हे जोगी ज्ञान, विवेक, भोग सब इस दुनिया में जोगी जैसे हैं ।
आज दिव्य सत्संग के समापन अवसर पर भीमसेन मेहंदी रत्ता व अशोक शर्मा आर्य ने सभी सहयोगियों का दिल से आभार व्यक्त किया।
अशोक शर्मा आर्य
9837506223



















