
रुड़की। शहर में यातायात और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। जिन स्थानों पर पहले पुलिस पिकेट हुआ करती थीं और जहां पुलिस की मौजूदगी से लोगों में सुरक्षा का एहसास रहता था, वहां अब बड़ी-बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई जा रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एलईडी स्क्रीन भले ही विज्ञापन और प्रचार-प्रसार का माध्यम हों, लेकिन उनकी जगह सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। कई लोगों का मानना है कि व्यस्त चौराहों और प्रमुख मार्गों पर पुलिस की मौजूदगी कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात नियंत्रित करने और आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए अधिक महत्वपूर्ण है।


लोगों का कहना है कि शहर के विकास के साथ आधुनिक सुविधाएं भी जरूरी हैं, लेकिन सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यदि किसी स्थान पर पुलिस पिकेट हटाई गई है, तो उसके स्थान पर वैकल्पिक सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या शहर में प्रचार और विज्ञापन को प्राथमिकता दी जा रही है, या फिर सार्वजनिक सुरक्षा को भी समान महत्व मिलेगा? इस मुद्दे पर संबंधित विभागों की ओर से स्पष्ट जवाब और संतुलित व्यवस्था की अपेक्षा की जा रही है।





