Latest Update

लावारिसों की वारिस क्रांतिकारी शालू सैनी ने मानव सेवा को बनाया जीवन धर्म,लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के साथ ही सक्रिय हैं अन्य सामाजिक कार्यों में

रुड़की।क्रांतिकारी शालू सैनी भारत की उन विरल समाजसेवियों में से हैं,जिन्होंने मानवता की सेवा को अपना जीवन-धर्म बनाया है।उन्होंने समाज के उस वर्ग के लिए कार्य किया है,जिसे मृत्यु के बाद भी अक्सर सम्मान नहीं मिल पाता।पिछले कई वर्षों से वे देशभर में लावारिस,अज्ञात,असहाय एवं परित्यक्त शवों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार का कार्य कर रही हैं।साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट के माध्यम से उन्होंने हजारों ऐसी आत्माओं को धार्मिक परंपराओं और मानवीय गरिमा के साथ अंतिम विदाई दी है,जिनका कोई अपना अंतिम संस्कार करने के लिए उपस्थित नहीं था।कोरोना महामारी के दौरान जब संक्रमण के भय से लोग अपने परिजनों के अंतिम संस्कार से भी दूरी बना रहे थे,तब शालू सैनी ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए लावारिस और असहाय मृतकों के अंतिम संस्कार का दायित्व स्वयं संभाला।उन्होंने न केवल शवों का दाह संस्कार किया,बल्कि उनकी अस्थियों का संरक्षण कर उन्हें हरिद्वार में विधि-विधान से गंगा में विसर्जित भी किया। उनका यह कार्य केवल सामाजिक सेवा नहीं,बल्कि मानव गरिमा और करुणा का अनुपम उदाहरण है।शालू सैनी की विशेषता यह है कि वे धर्म,जाति,वर्ग और क्षेत्र से ऊपर उठकर प्रत्येक मृतक को सम्मानजनक विदाई देने में विश्वास रखती हैं। हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई अथवा अन्य किसी भी समुदाय के व्यक्ति की मृत्यु होने पर वे संबंधित धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार सुनिश्चित करती हैं।उनका यह कार्य भारतीय संविधान की समावेशी भावना और “सर्वधर्म समभाव” के आदर्श को व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करता है।एक महिला होने के बावजूद उन्होंने उन सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती दी,जिनके अनुसार महिलाओं की शमशान और अंतिम संस्कार में सीमित भूमिका मानी जाती थी।उन्होंने स्वयं शमशान घाटों में जाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया संपन्न की और समाज को यह संदेश दिया कि मानव सेवा का कोई लिंग नहीं होता।साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट,जिसकी स्थापना वर्ष 2019 में हुई,उनके नेतृत्व में मानवाधिकार, महिला सशक्तिकरण,स्वास्थ्य, विधिक जागरूकता और सामाजिक कल्याण के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत है। हालांकि उनकी सबसे विशिष्ट पहचान लावारिस एवं असहाय मृतकों को सम्मानजनक अंतिम विदाई देने के अभियान से बनी है।क्रांतिकारी शालू सैनी का जीवन संदेश देता है कि मानवता की सेवा केवल जीवितों तक सीमित नहीं है,बल्कि मृत्यु के बाद भी प्रत्येक व्यक्ति सम्मान और गरिमा का अधिकारी है।उन्होंने अपने कार्यों से यह सिद्ध किया है कि करुणा,साहस और निस्वार्थ सेवा किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति होती है।हजारों बेसहारा और लावारिस मृतकों को सम्मानजनक अंतिम संस्कार प्रदान कर उन्होंने भारतीय समाज में मानवीय मूल्यों की एक नई मिसाल स्थापित की है।उनके द्वारा किया गया यह अद्वितीय और असाधारण योगदान उन्हें भारत के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान “पद्मश्री” के लिए अत्यंत योग्य बनाता है।

Samarth Bharat News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Samarth Bharat News