
दशहरा पर्व भारतीय संस्कृति और परंपरा में विशेष महत्व रखता है। यह पर्व भगवान श्रीराम द्वारा रावण पर विजय प्राप्त करने की याद दिलाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर संसार को संदेश दिया था कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में जीत सत्य और धर्म की ही होती है।

रावण दहन के दौरान आसमान में उठती आग की लपटों को देखकर उपस्थित लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इस आयोजन का आनंद लिया। लोगों ने एक-दूसरे को दशहरे की शुभकामनाएं देते हुए समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देने का संदेश दिया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि दशहरा केवल रावण के पुतले का दहन करने का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और अन्य बुराइयों को समाप्त करने की प्रेरणा भी देता है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें मर्यादा, सत्य, त्याग और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की सीख देता है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में दशहरा पर्व की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में अच्छे विचारों को अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए।
रावण दहन के साथ ही लोगों ने बुराई को त्यागने और अच्छाई को अपनाने का संकल्प लिया। चारों ओर गूंजते जय श्रीराम के जयकारों के बीच विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देकर संपन्न हुआ।
इस अवसर पर अध्यक्ष राम जी भट्टेजा,सचिव धर्मपाल लखवानी,कोषाध्यक्ष सतीश कालरा,उपाध्यक्ष संजीव अरोड़ा (हरिशा),सहसचिव अमित चिटकारा,मुख्य प्रबंधक मन्नू मेहंदीरत्ता,किशन लाल माटा, हरिओम अनेजा, संजीव लखवानी एवं चंदन मेहंदीरत्ता (हैप्पी),सदस्य डॉ. आई.के. अरोड़ा, संजय अरोड़ा,विनय चिटकारा, संजीव मेहंदीरत्ता, विकास कमल,भूपेश मेहंदीरत्ता,चंदन अनेजा, नीरज चड्ढा, तनु मेहंदीरत्ता, तिलक पिपलानी, संजीव लखनी, दीपक बतरा एवं पार्षद पंकज सतीजा, रत्नाकर शर्मा, सुरेंद्र कुमार अरोड़ा, गुलशन अनेजा, जगदीश मेहंदीरत्ता आदि उपस्थित रहे।



















