
उत्तराखंड में सरकारी जमीनों और संपत्तियों को लीज पर देने पर जिला कांग्रेस कमेटी रुड़की महानगर अध्यक्ष राजेंद्र चौधरी एडवोकेट द्वारा जारी प्रेस नोट में राज्य सरकार पर सरकारी जमीनों और बेशकीमती संपत्तियों को निजी कंपनियों के हाथों देने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

कांग्रेस के मुताबिक, उत्तराखंड सरकार ने सरकारी विभागों की भूमि को नीलाम करने का रास्ता खोल दिया है और इसके लिए उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड यानी यूआईआईडीबी का गठन किया गया है।
प्रेस नोट में दावा किया गया है कि वर्ष 2023 में करीब 142 एकड़ सरकारी भूमि को राजस्व ऐरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड को 15 साल की लीज पर देने का मामला सामने आया था। कांग्रेस का आरोप है कि इस जमीन का बाजार मूल्य करीब 30 हजार करोड़ रुपये बताया गया, जबकि इसे लगभग एक करोड़ रुपये प्रति साल की लीज पर दिए जाने की बात कही गई है।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया है कि जिस जमीन को लीज पर दिया गया, उसी वर्ष उस पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए और बाद में उसी संपत्ति को निजी कंपनी को लीज पर देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
प्रेस नोट में जॉर्ज एवरेस्ट लीज का भी उल्लेख है। कांग्रेस का कहना है कि राज्य सरकार के सरकारी विभागों की जमीन और संपत्तियों को बेचने या लंबे समय के लिए लीज पर देने के लिए 17 अक्टूबर 2023 को उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कानून लाया गया।
कांग्रेस के अनुसार, इस व्यवस्था के तहत सरकारी संपत्तियों को लंबे समय तक लीज पर देने का प्रावधान बनाया गया है और यूआईआईडीबी के माध्यम से कई प्रस्तावों पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
प्रेस नोट में यह भी दावा किया गया है कि करीब 1200 एकड़ यानी 6000 बीघा भूमि से जुड़े प्रस्तावों पर मुख्यमंत्री की मंजूरी की प्रक्रिया हुई है, जबकि कई हजार बीघा जमीनों के प्रस्ताव विभिन्न स्तरों पर लंबित बताए गए हैं।
कांग्रेस ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली अनुशंसा समिति की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। प्रेस नोट के मुताबिक, विभिन्न विभागों की सरकारी जमीनों और संपत्तियों को निजी उपयोग के लिए दिए जाने के प्रस्ताव समिति के माध्यम से आगे बढ़ाए जा रहे हैं।
इसके अलावा कांग्रेस ने 15 मार्च 2024 की बैठक का हवाला देते हुए कहा है कि देहरादून में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के लिए 10 एकड़ जमीन और राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय के लिए 50 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव भी रखे गए थे, लेकिन इन प्रस्तावों पर निर्णय को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
रुड़की महानगर कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र चौधरी एडवोकेट का कहना है कि सरकारी जमीन और संपत्तियां सार्वजनिक हित से जुड़ी हैं और इन्हें निजी हाथों में देने की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और नियमों की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।
वहीं, सरकारी संपत्तियों के उपयोग और निवेश से जुड़े फैसलों को लेकर सरकार की ओर से अलग-अलग मौकों पर निवेश, विकास और संपत्तियों के बेहतर उपयोग की नीति की बात कही जाती रही है।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी जमीनों और बेशकीमती संपत्तियों को लीज या नीलामी पर देने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है, किन नियमों के तहत फैसले लिए जा रहे हैं और इन संपत्तियों का उपयोग किस उद्देश्य से किया जाएगा।
प्रेस वार्ता में जिलाध्यक्ष राजेन्द्र चौधरी, जिला उपाध्यक्ष डॉ हरविंदर सिंह मदन पाल भड़ाना संजय गुड्डू जिला महामंत्री मुनफेत अली वैभव सैनी मोहित त्यागी कार्यालय सचिव नूर आलम राजा मौजूद रहे



















