
रुड़की। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। पंचशील काली मंदिर, रुड़की में इस वर्ष भी जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम और धार्मिक आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर बाल कलाकारों द्वारा विशेष रूप से कृष्ण लीला का मंचन किया जाएगा।

कार्यक्रम के संबंध में जानकारी देते हुए आयोजक ने “कृष्णाय वासुदेवाय, देवकीनंदनाय च, नंदकुमाराय गोविंदाय नमो नमः” का स्मरण करते हुए समस्त भारतवासियों और सनातन धर्मावलंबियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा और यह विशेष संयोग है कि देश के विभिन्न हिस्सों में पर्व एक ही दिन मनाए जाने की खुशी श्रद्धालुओं में देखने को मिल रही है।
उन्होंने बताया कि पंचशील काली मंदिर में प्रत्येक वर्ष जन्माष्टमी का आयोजन भव्य रूप से किया जाता है। इस बार आयोजन में कुछ नया करने का प्रयास किया गया है। बाल कलाकारों द्वारा कृष्ण लीला का मंचन किया जाएगा, जिसका शुभारंभ रात करीब 8:30 बजे होगा और कार्यक्रम रात 12 बजे तक चलेगा। इस दौरान कृष्ण जन्म से जुड़े विभिन्न प्रसंगों एवं धार्मिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी।
भगवान की झांकी को लेकर जताई आपत्ति
कार्यक्रम के दौरान आयोजक ने भगवान की झांकियों को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भगवान की झांकी सजाना और उसे श्रद्धा के साथ स्थापित करना गलत नहीं है, लेकिन भगवान के स्वरूप को झांकी के रूप में प्रस्तुत करके उनसे नृत्य करवाने की परंपरा का वह विरोध करते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान को एक स्थान पर श्रद्धापूर्वक विराजमान किया जाए और उनके समक्ष अन्य पात्रों के माध्यम से धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जा सकते हैं। उनका कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण की गरिमा और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।
आयोजक ने बताया कि इसी विचार को ध्यान में रखते हुए इस बार उनकी टीम ने यह निर्णय लिया है कि भगवान की झांकी के स्वरूप में किसी प्रकार का नृत्य नहीं कराया जाएगा। इसके बजाय बाल कलाकारों के माध्यम से कृष्ण लीला का मंचन किया जाएगा।
उन्होंने अन्य आयोजकों और श्रद्धालुओं से भी अपील की कि जन्माष्टमी के पावन पर्व को धार्मिक मर्यादा, श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की झांकी सजाने के साथ-साथ उनके जीवन और शिक्षाओं को मंचन के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना अधिक सार्थक प्रयास हो सकता है।
पंचशील काली मंदिर में होने वाले इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों में उत्साह है। रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म के अवसर पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम के साथ जन्माष्टमी उत्सव का समापन होगा।



















