
रुड़की।ज्योतिष गुरुकुलम,पुरानी तहसील रुड़की में चल रही श्रीशिव महापुराण कथा में कथाव्यास आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने गौ माता की महिमा,उत्पत्ति एवं गौ सेवा के महत्व का विस्तार से वर्णन किया।आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म में गौ माता का स्थान अत्यंत पवित्र और पूजनीय है।गौ माता में समस्त देवी-देवताओं का वास माना गया है।गौ माता की सेवा,पूजा और संरक्षण से देवगण प्रसन्न होते हैं तथा जीवन में धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।उन्होंने गौ माता की उत्पत्ति और सनातन परंपरा में उनके महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि भारत भूमि गौ माता की भूमि है।भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की कथाओं में भी गौ माता का विशेष महत्व दिखाई देता है।भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं गोसेवा और गोपालन के माध्यम से संसार को गौ माता के प्रति प्रेम,करुणा और संरक्षण का संदेश दिया।कथा व्यास ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि गौ माता की सेवा केवल धार्मिक कर्तव्य ही नहीं,बल्कि सनातन संस्कृति,करुणा और प्रकृति संरक्षण की महान परंपरा है।प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार गौ सेवा,गौ संरक्षण तथा गौ पालन में सहयोग करना चाहिए।उन्होंने कहा कि गौ सेवा से सारे देवता प्रसन्न होते हैं।गौ माता की सेवा करने से शक्ति प्राप्त होती है और गौ सेवा परम आनंद देता है।भारत भूमि गौ माता की भूमि है।देवताओं की भूमि ह।भारत भूमि तप तथा भारत भूमि में देवता निवास करते हैं।गौ माता की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई संपूर्ण मनुष्य के कल्याणकारी है।इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिव महापुराण कथा का श्रवण कर गौ माता की महिमा का पुण्य लाभ प्राप्त किया।




















