ईदुल अजहा के मुबारक मौके पर इस पवित्र त्यौहार को अमन,भाईचारे और आपसी सौहार्द के साथ मनाने का किया आह्वान

रुड़की।मदरसा अरबिया रहमानिया के प्रधानाचार्य मौलाना अजहरूल हक ने ईदुल अजहा के मौके पर आवाम से अपील करते हुए कहा कि त्याग और बलिदान के इस पवित्र त्यौहार को एकता,भाईचारे के साथ मनाएं और प्यार व मोहब्बत का पैगाम दें।मौलाना अजहरुल हक ने कहा कि ये पवित्र त्यौहार इस्लाम धर्म में नबी हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के इम्तिहान,त्याग और अल्लाह यानी ईश्वर की अटूट विश्वास से जुड़ा है,जो आज से चार हजार साल पुराना है।यह केवल एक त्यौहार नहीं,बल्कि अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुकाने,त्याग और बलिदान का वह हिस्सा है जो दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता।इब्राहिम अलैहिस्सलाम के दौर से ही इस्लाम धर्म में कुर्बानी की यह परंपरा दस जिल हिज्जा यानी ईदुल अजहा के समय में शुरू हुई,हालांकि कुर्बानी की परंपरा दुनिया में इस्लाम धर्म के अनुसार पहले नबी हजरत आदम अलैहिस्सलाम के समय से ही शुरू हो चुकी थी,लेकिन उसका एक समय निर्धारित नहीं था।उन्होंने मुस्लिम आवाम से अपील करते हुए कहा कि ईदुल अजहा की नमाज पूर्व निर्धारित स्थानों पर अदा करें।सड़क पर नमाज ना पढ़े और त्यौहार के दिन साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।खुले में कुर्बानी और प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी ना करें।नालियों एवं सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी के अवशेष ना डालें तथा कुर्बानी करते समय कोई फोटो या वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी ना डालें।दूसरे धर्म के लोगों की भावनाओं का आदर करते हुए इस त्यौहार को प्यार,मोहब्बत, भाईचारे और सौहार्द के साथ मनाएं।मदरसा अरबिया रहमानिया के प्रशासक हाजी मोहम्मद मुस्तकीम ने भी ईदुल अजहा के त्यौहार पर दूसरे धर्म के लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कहा कि भारत की मिट्टी में गंगा-जमुनी तहजीब बसती है,इसलिए कोई ऐसा कार्य न करें,जिससे माहौल खराब हो।अफवाह से बचें और कुर्बानी त्याग तथा अल्लाह की रजा के लिए इस त्यौहार को सादगी और भाईचारे के साथ मनाएं।उन्होंने कहा कि हमवतन भाइयों की आस्था का सम्मान करना भी हमारी इबादत का ही हिस्सा है।सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हुए ईदुल अजहा की नमाज ईदगाह और अपनी-अपनी मस्जिदों में अदा करें। वरिष्ठ समाजसेवी इंजीनियर मुजीब मलिक ने लोगों से इस त्यौहार को शांति,सौहार्द के साथ मनाने की अपील की।उन्होंने खासतौर पर युवाओं से कुर्बानी के दौरान वीडियो या फोटो ना बनाने का आग्रह किया तथा कहा कि सभी लोग कुर्बानी खुले स्थान या सार्वजनिक स्थानों पर ना कर चार दिवारी के अंदर ही करें,ताकि किसी दूसरे समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत न हो।इस त्यौहार को इबादत समझ कर मनाएं और शासन-प्रशासन का सहयोग करें।उन्होंने कहा कि ईदुल अजहा का यह त्यौहार कुर्बानी,त्याग और इंसानियत का पैगाम देता है,हमें इसी जज्बे के साथ इसे मनाना चाहिए।

*नगर में ईदगाह व अन्य मस्जिदों में ईदुल अजहा की नमाज का मुकर्रर वक्त-*

-मस्जिद बिलाल रिक्शा स्टैंड प्रातः5:45 बजे

-मस्जिद उमर बिन खत्ताब प्रातः 5:45 बजे 

-बड़ी मस्जिद अंबर तालाब प्रातः 5:45 बजे

-मस्जिद गफूरिया,सोलानी नदी प्रातः 5:45 बजे

-मलकपुर चुंगी मस्जिद प्रातः 5:45 बजे 

-मस्जिद शेख बेंचा,इमली रोड प्रातः 5:50 बजे 

-नूर मस्जिद,इमली रोड प्रातः 6:05 बजे 

-जामा मस्जिद रुड़की प्रातः 6:00 बजे 

-मस्जिद हव्वा रामपुर रोड प्रातः 6:00 बजे 

-जामा मस्जिद लालकुर्ती प्रातः 7:30 बजे 

-ईदगाह रुड़की प्रातः 7:45 बजे

-रामपुर मदरसा इरफानुल उलूम प्रातः 5:45 बजे 

-रामपुर ईदगाह प्रातः 6:15 बजे

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