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व्यास पीठ से पंडित जगदीश पैंनूली ने सुनाए शिव तत्व और भक्ति के प्रसंग, कल कथा विराम के साथ होगा यज्ञ एवं पूर्णाहुति

शहर के सुभाष नगर स्थित खाटू श्याम मंदिर, पीपल वाली गली में 18 से 25 अगस्त तक आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के छठे दिन रविवार को भगवान शिव की महिमा, शिव तत्व और भक्ति से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर कथा का श्रवण किया। कथा के दौरान पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठा।

मुख्य यजमान सपना सैनी, हर्ष सैनी और राशि सैनी के सौजन्य से आयोजित कथा में व्यास पीठ पर विराजमान पंडित जगदीश पैंनूली ने भगवान शिव के स्वरूप और उनकी महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव देवों के देव महादेव हैं और उनका स्वरूप हमें जीवन में सरलता, त्याग, करुणा, संयम और समर्पण का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव ऐसे आराध्य हैं जो भक्त की भावना को देखते हैं। सच्चे मन से की गई भक्ति और श्रद्धा भगवान शिव को प्रिय है।

पंडित जगदीश पैंनूली ने श्रद्धालुओं को समझाया कि शिव महापुराण का श्रवण केवल कथा सुनने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि कथा में बताए गए संदेशों को अपने जीवन में उतारना ही वास्तविक शिव भक्ति है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन से अहंकार, क्रोध, लोभ और द्वेष को दूर करने का प्रयास करना चाहिए तथा सत्य, सेवा, दया और सदाचार के मार्ग पर चलना चाहिए। भगवान शिव का जीवन हमें यही प्रेरणा देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और संयम बनाए रखना चाहिए।

व्यास जी ने भगवान शिव के वैराग्य और गृहस्थ जीवन के संतुलन का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान शिव का स्वरूप अपने आप में जीवन का अद्भुत संदेश है। एक ओर वे कैलाश पर तप और साधना में लीन रहने वाले योगेश्वर हैं, तो दूसरी ओर माता पार्वती और अपने परिवार के प्रति प्रेम एवं जिम्मेदारी निभाने वाले गृहस्थ भी हैं। उन्होंने कहा कि शिव-पार्वती का जीवन पति-पत्नी के बीच विश्वास, समर्पण और परस्पर सम्मान का आदर्श प्रस्तुत करता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं को शिव नाम के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि भगवान का स्मरण मन को शांति प्रदान करता है। जब मनुष्य नियमित रूप से ईश्वर का चिंतन करता है तो उसके भीतर सकारात्मक विचारों का विकास होता है और वह जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना अधिक धैर्य के साथ कर पाता है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में कथा और सत्संग का उद्देश्य व्यक्ति को धर्म से जोड़ने के साथ-साथ उसके आचरण में भी सकारात्मक परिवर्तन लाना है।

कार्यक्रम में आचार्य मंडली के आचार्य अनुज नौटियाल, आचार्य दिनेश सेमवाल, आचार्य प्रकाश नौटियाल, पंडित देवेश एवं समर ने विधि-विधान से विशेष पूजन-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए।

कल होगा कथा विराम, यज्ञ एवं पूर्णाहुति
श्री शिव महापुराण कथा का समापन एवं कथा विराम कल 24 अगस्त को किया जाएगा। कथा के अंतिम अवसर पर विधि-विधान से यज्ञ एवं पूर्णाहुति का आयोजन होगा। आचार्य मंडली द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ में आहुतियां प्रदान कराई जाएंगी। आयोजक परिवार ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा के अंतिम दिवस, यज्ञ एवं पूर्णाहुति में शामिल होने और धार्मिक अनुष्ठान का पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की है।

आयोजन में श्रीमती कमला बमोला, भावना देवी, संतोषी माता कीर्तन मंडली, खाटू श्याम कीर्तन मंडली, सुनीता चौधरी, ऋतू चौधरी, शालू शर्मा, सुनील भटनागर, डॉ. संजय, नीलम सिंह, अमर देवी रावत, कुसुम सुंदरियाल, पूनम शर्मा, अनंत शर्मा, वंदना बडोनी, ममता चौधरी, खुशी जोशी, सूरत सिंह, अरुणा त्यागी, चित्रकुमार, देवेंद्र तोमर, रश्मि तोमर, लविश, कशिश, मेघा चौधरी, कृष्णा बड़तवाल, पंकज, कान्हा, मनोज भटनागर, कुलदीप अग्रवाल, कमलेश देवी, यशोदा नौटियाल, शांति नेगी, वीरवाला सुशी जोशी एवं निर्मला जोशी सहित सभी सहयोगियों का योगदान बना हुआ है।

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