
रुड़की।ज्योतिष गुरुकुलम,पुरानी तहसील रुड़की में चल रही श्रीशिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर कथा व्यास आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने श्रद्धालुओं को श्री शिव-शक्ति के रहस्य,मां गंगा की महिमा तथा रुद्राक्ष के आध्यात्मिक महत्व का विस्तारपूर्वक वर्णन सुनाया।आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने कहा कि भगवान शिव और शक्ति एक-दूसरे के पूरक हैं।शिव चेतना के स्वरूप हैं और शक्ति सृष्टि की मूल ऊर्जा है।शिव-शक्ति की आराधना से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति,सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में संतुलन की प्राप्ति होती है।उन्होंने शिव-शक्ति के विभिन्न स्वरूपों और उनकी उपासना के महत्व पर प्रकाश डाला।कथा के दौरान मां गंगा के अवतरण और उनके शिव की जटाओं में धारण होने के रहस्य का भी वर्णन किया गया।उन्होंने बताया कि मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से पृथ्वी पर अवतरित हुई तथा सनातन परंपरा में गंगा को पवित्रता,मोक्ष और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना गया है।गंगाजल का धार्मिक अनुष्ठानों और भगवान शिव के अभिषेक में विशेष महत्व बताया गया।आचार्य जी महाराज ने रुद्राक्ष की महिमा बताते हुए कहा कि रुद्राक्ष को भगवान शिव के अश्रुओं से उत्पन्न माना गया है।विभिन्न मुख वाले रुद्राक्षों का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है।रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप,भगवान शिव की आराधना और ध्यान करने से मन को एकाग्र करने तथा आध्यात्मिक साधना को मजबूत करने में सहायता मिलती है। रुद्राक्ष धारण करने से रोग दूर होते हो,मन को शांति मिलती है।विद्यार्थी को विद्या मिलती है और शरीर में शक्ति का संचरण होता ह,इसलिए रुद्राक्ष धारण करने वाला व्यक्ति भगवान शंकर की कृपा का पात्र बनता है।उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान शिव की भक्ति,रुद्राभिषेक,गंगाजल अर्पण और रुद्राक्ष धारण करने की धार्मिक परंपराओं को श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ अपनाने का आह्वान किया।कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर शिव महापुराण का श्रवण किया और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया।इस अवसर पर राधा भटनागर,चित्रा गोयल,सुलक्षणा सेमवाल,पूजा वर्मा,रेनू शर्मा,कमलेश धीमान,नीलम सिंघल आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।




















