
रुड़की।ज्योतिष गुरुकुलम में चल रही श्रीशिव महापुराण कथा में कथा व्यास आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने भगवान शिव की महिमा,शिवलिंग के रहस्य एवं शिवलिंग पूजन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि शिवलिंग भगवान शिव के निराकार एवं साकार स्वरूप का प्रतीक है।शिवलिंग की पूजा मनुष्य को आध्यात्मिक शांति, भक्ति और आत्मिक उन्नति की ओर ले जाती है।आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने कहा कि भगवान शिव का जलाभिषेक,दुग्धाभिषेक,पंचामृत एवं अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक श्रद्धा और भावना के साथ करने का विशेष महत्व है।शिवलिंग पर जल अर्पित करने से मन को शांति मिलती है तथा भगवान शिव की आराधना से जीवन में सकारात्मकता,संयम और सद्भाव की भावना विकसित होती है।उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान शिव की भक्ति सरल और शीघ्र फल प्रदान करने वाली साधना मानी गई है।कथा के दौरान आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने द्वादश ज्योतिर्लिंगों की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया।उन्होंने सोमनाथ,मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर,ओंकारेश्वर,केदारनाथ, भीमाशंकर,काशी विश्वनाथ,त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ,नागेश्वर,रामेश्वर तथा घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंगों के महत्व और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को श्रद्धालुओं के समक्ष रखा।उन्होंने बताया कि द्वादश ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के दिव्य प्रकाशस्वरूप की उपासना के प्रमुख केंद्र हैं।श्रद्धा एवं नियमपूर्वक इन ज्योतिर्लिंगों का स्मरण,दर्शन और पूजन करने से भक्त के भीतर शिवभक्ति दृढ़ होती है।धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्योतिर्लिंगों की आराधना से मनोकामना पूर्ति,मानसिक शांति, संकटों से मुक्ति,आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।आचार्य ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि भगवान शिव की पूजा केवल बाहरी कर्मकांड तक सीमित न रखकर सत्य,संयम,सेवा,करुणा और सदाचार को अपने जीवन में अपनाएं।शिव आराधना का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य के भीतर के अहंकार,नकारात्मकता और अज्ञान का नाश कर उसे परमात्मा से जोड़ना है।कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भगवान शिव का स्मरण किया और हर-हर महादेव के जयघोष से कथा परिसर गुंजायमान हो उठा।




















