Latest Update

डॉटर्स डे पर क्लिनिक प्लस का संदेश,बेटी होती है माँ की मजबूती

हरिद्वार।”माँ की मजबूरी नहीं,बेटी होती है माँ की मजबूती”। यही विचार क्लिनिक प्लस की नई फिल्म के केंद्र में है।डॉटर्स डे से ठीक पहले क्लिनिक प्लस ने माँ और बेटी के रिश्ते पर भावपूर्ण फिल्म प्रस्तुत की है।यह फिल्म आज की बेटी को सिर्फ पाली-पोसी जाने वाली संतान के रूप में नहीं,बल्कि अपनी माँ के सबसे बड़े सहारे के रूप में सामने रखती है।फिल्म की कहानी एक पुस्तक विमोचन समारोह के इर्द-गिर्द बुनी गई है,जहाँ एक लेखिका अपने ही जीवन से निकली कविताओं का संग्रह लेकर सामने आती है,जब उससे पूछा जाता है कि उसके लेखन की प्रेरणा कौन है,तो माँ बस अपनी बेटी की ओर इशारा कर देती है।यहीं से कहानी बचपन के एक पल में लौटती है,जब नन्ही बच्ची दो चोटियों की जगह एक ही चोटी बनवाने की जिद करती है और यहीं से वह बुनियादी रूपक गढ़ा जाता है कि असली मजबूती भीतर से आती है।जैसे-जैसे साल बीतते हैं,दोनों का रिश्ता खामोश निगरानी से बढ़कर सक्रिय साथ में बदल जाता है।जब माँ के आसपास हर कोई उसे एक मुश्किल शादी में समझौता करने और सह लेने की सलाह देता है,तब बेटी ही है जो उसे यह हालात नए सिरे से देखने में मदद करती है।हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) में ब्यूटी एंड वेलबीइंग की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हरमन ढिल्लों ने कहा कि “एक माँ अपनी बेटी को मजबूत,संवेदनशील और आत्मनिर्भर बनाती है तथा एक दिन वही बेटी माँ का सबसे बड़ा सहारा बन जाती है।यह फिल्म उसी खूबसूरत बदलाव का उत्सव है,जहाँ माँ का दिया हुआ आत्मविश्वास लौटकर उसी का संबल और हौसला बन जाता है।हम यह कहानी देश की उन 1.3 करोड़ सिंगल मदर्स को समर्पित करते हैं,जिनकी जीवटता न केवल उनकी बेटियों का भविष्य गढ़ती है,बल्कि यह भी साबित करती है कि बेटी होती है माँ की मजबूती।

Samarth Bharat News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Samarth Bharat News