
मैत्री कन्या गुरुकुल, मुंडाखेड़ा (लक्सर) के वार्षिक उत्सव में शामिल होकर मन भावविभोर हो गया। यह गुरुकुल पिछले कई वर्षों से 50 से अधिक असहाय परिवारों की बेटियों को नि:शुल्क शिक्षा और वैदिक संस्कार देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रशंसनीय कार्य कर रहा है।
यहां का शांत, अनुशासित और संस्कारमय वातावरण वास्तव में भारतीय संस्कृति की सजीव झलक देता है। कार्यक्रम की शुरुआत बेटियों द्वारा प्रस्तुत मधुर भजनों और प्रेरणादायक गीतों से हुई, जिनमें राष्ट्रभक्ति, धर्म और सेवा का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

इसके बाद बालिकाओं ने तलवार और लाठी संचालन जैसी कलाओं में दक्षता का प्रदर्शन कर यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह आत्मबल, आत्मरक्षा और आत्मविश्वास का भी निर्माण करती है।
मैत्री कन्या गुरुकुल केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि वह स्थान है जहां भारतीय जीवन मूल्यों की नींव रखी जा रही है। सावित्री जी और गुरुकुल परिवार का समर्पण वास्तव सराहनीय है।






