रुड़की। हरिद्वार राजमार्ग स्थित कोर विश्वविद्यालय मे आज शिक्षक दिवस बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। जिसमें डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व शिक्षा मंत्री भारत सरकार एवं सांसद हरिद्वार लोक सभा मुख्य अतिथि रहे और प्रमुख सामाजिक सुधारक व आरएसएस क्षेत्र प्रचारक पश्चिमी उत्तर प्रदेश पदम सिंह व कुलाधिपति कोर विश्वविद्यालय श्री. जे.सी. जैन, ने विशिष्ट अतिथि के रूप में हिस्सा लिया।

कोर विश्वविद्यालय, रुड़की, ने शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य मे एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित कर एक उत्कृष्ट समारोह संपन्न किया, जिसमें शिक्षकों के अमूल्य योगदान को मान्यता दी गई की शिक्षक है सुदृढ़ समाज का आधार है जो छात्रों के जीवन को आकार देने में मदद करने के साथ-साथ एक सुदृढ़ समाज का निर्माण करता है।

शिक्षक दिवस के अवसर पर कोर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस उत्कृष्ट समारोह में बहुत सी महत्वपूर्ण बातें की गई जिन्हें देश के प्रतिष्ठित वक्ताओं अतिथियों ने कहा।
इस समारोह की शुरुआत एक गरिमामय उद्घाटन समारोह के साथ हुई, जिसमें डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, मुख्य अतिथि पदम सिंह विशिष्ट अतिथि, कुलाधिपति कोर विश्वविद्यालय जे.सी. जैन, विशिष्ट अतिथि, कुलपति डॉ. पंकज गुप्ता, प्रतिकुलपति श्रेयांश जैन प्रतिकुलपति डॉ. बी.एम सिंह, कोर विश्वविद्यालय के अन्य अतिथियों की उपस्थिति में प्रारंभ हुआ।
प्रतिकुलपति कोर विश्वविद्यालय श्रेयांश जैन ने उद्घाटन भाषण दिया, जिसके अंतर्गत उन्होंने सभी अतिथियों शिक्षकों छात्रों का स्वागत करते हुए । उन्होंने शिक्षकों की जीवन में भूमिका पर जोर दिया, और अपने-अपने शिक्षकों को कभी ना भूलने का आह्वान किया । देश के भविष्य की संरचना देने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को बताया। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों के समर्पण के महत्व को स्पष्ट किया, और छात्रों को यह समझाया कि शिक्षक सिर्फ ज्ञान के प्रसारक नहीं हैं, बल्कि मूल्यों का संचालक भी हैं।
जे.सी. जैन, कुलाधिपति कोर विश्वविद्यालय ने बदलते परिवेश में बदलती हुई शिक्षकों की जिम्मेदारियो को विस्तार से बताया। साथ ही उन्होंने बताया कि आज शिक्षा में तकनीकी का महत्व कितना बढ़ गया है । उन्होंने कहा आज उच्च तकनीकी के बिना शिक्षण कार्य संभव ही नहीं है।
उन्होंने कहा आज शिक्षक देश की बौद्धिक और नैतिक गठरी को आकार देने मे जिम्मेदार होने के साथ-साथ सक्षम भी हैं। उन्होंने शिक्षकों शिक्षा के प्रति अपनी शुभकामना प्रेषित करते हुए खूब प्रशंसा व्यक्त की, और छात्रों से उनके शिक्षक-छात्र संबंधों को जीवन भर का बंधन मानने का प्रोत्साहन दिया। श्री. जैन ने शिक्षकों को उच्च क्षमता विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया । और उन्हें विद्यालय के विभिन्न विभागों में शिक्षण की नवाचारिक विधियों को अपनाने और शिक्षा में अद्यतन रहने का सुझाव दिया, ताकि वे छात्रों को शिक्षा की सर्वोत्तम गुणवत्ता प्रदान कर सकें। उनके भाषण ने छात्रों और शिक्षकों मे शिक्षा के लिए गहरी भावना और कार्ययापन के महत्व को स्थापित किया।
आरएसएस क्षेत्र प्रचारक प्रमुख पदम जी ने कहा कि शिक्षक के हाथ में प्रलय और निर्माण दोनों खेलते हैं गुरु द्रोणाचार्य का उदाहरण देकर उन्होंने बताया की एक शिक्षक का महत्व क्या है। यह हमारा ही इतिहास हमें बताता है । छात्रों को हमेशा गुरु के प्रति आदर सम्मान सत्कार की भावना रखनी चाहिए और धन्यवाद व्यापित करना चाहिए अपने उन सभी शिक्षकों का जिनके कारण आज वह अपने जीवन के सफल पड़ाव पर है।
भारतीय संस्कृति में पौराणिक काल से गुरु शिष्य परंपरा रही है, श्री पदम सिंह जी, ने शिक्षकों के समाज पर गहरे प्रभाव, उनके ज्ञान और मूल्यों के के बारे में एक महत्वपूर्ण भाषण दिया। उन्होंने बताया कि शिक्षा केवल शैक्षिक, शिक्षा के बारे में नहीं है, बल्कि नैतिक मूल्यों को समावेशित किया जाता है। श्री पदम सिंह जी ने छात्रों से अपने शिक्षकों को मार्गदर्शक के रूप में सम्मान करने और शिक्षकों द्वारा उनके भविष्य को आकार देने में किए जाने वाले त्याग को पहचानने की सलाह दी। उनका भाषण उपस्थित सभी लोगों को शिक्षा के बड़े सामाजिक परिणामों की याद दिलाने के रूप में कार्य किया और हम सभी को याद दिलाया कि हमें शिक्षकों को मूल्य और सम्मान देने का महत्वपूर्ण है, क्योंकि हम मिलकर एक बेहतर भविष्य की ओर काम करते हैं।
डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, मुख्य अतिथि, ने सर्वप्रथम शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दी उन्होंने शिक्षकों को भविष्य निर्माता और आज के नेता को समाज सेवक कहा । उन्होंने कोर विश्वविद्यालय की शिक्षा की उत्कृष्टता के प्रति प्रशंसा के शब्द कहे बोला इस संस्था में प्रवेश पन किसी सौभाग्य से कम नहीं है, यहां बहुत सारे विद्यार्थी प्रवेश लेने के लिए प्रयासरत रहते हैं। और छात्रों को उनके शिक्षकों और संस्थान द्वारा प्रदान किये जाने वाले अवसरों का सदुपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने शिक्षा में नवाचार के महत्व को समावेशित करने की सलाह दी, शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण विधियों और प्रौद्योगिकी को छात्रों को भविष्य के चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए अपनाने की सलाह दी। उन्होंने अपनी खुद की शिक्षा से जुड़े किस्से साझा किए।
डॉ निशंक ने छात्रों को बड़े सपने देखने, कठिन मेहनत करने, महानता की ओर प्रयास करने की प्रोत्साहन दिया, जबकि उन्होंने उन्हें अपने शिक्षकों के प्रति विनम्र और कृतज्ञ रहने का सुझाव दिया।
डॉक्टर निशंक ने कहा भारत में गुरु शिष्य की अद्भुत परंपरा संवाहक पर्व शिक्षक दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।।
नई शिक्षा नीति संपूर्ण भारतवर्ष के शिक्षकों के लिए एक वरदान साबित होगी हर संस्थान नई शिक्षा नीति के प्रशंसा कर रहा है और जल्द से जल्द हर राज्य में हर विश्वविद्यालय में यह निक शिक्षा नीति भारत देश के भविष्य में एक अलग ही विकास की लहर लेकर आएगी।तक्षशिला एवं नालंदा विश्वविद्यालय पूरे विश्व के विद्यार्थी यहां पढ़ने आते थे और भारत विश्व गुरु कहलाता था आज इस दिशा में हम सभी को कम करने की आवश्यकता है जिसमें सभी शिक्षकों का योगदान एवं साथ ही सभी विद्यार्थियों का योगदान इतना ही अपेक्षित है।
उनका भाषण छात्रों और संकाय के बीच गहरी अर्थात्मक रिश्ते और शिक्षा की बदलती शक्ति के महत्व को दिखाते हुए उन्होंने छात्रों को उत्साह और उनके शिक्षा के योगदान के प्रति गहरी भावना के साथ छोड़ा।
इस कार्यक्रम को एक महात्म्य सफलता के रूप में मान्यता दी गई और इसमें शिक्षकों के महत्वपूर्ण योगदान को सार्थक और विवेकानंद छात्रों और संकाय के बीच गहरी कृतज्ञता और प्रशंसा की भावना को पैदा किया।”
धन्यवाद ज्ञापन के अंतर्गत कुलपति कोर विश्वविद्यालय डॉ. पंकज गुप्ता ने सभी अतिथियों छात्रों एवं शिक्षकों का हृदय से आभार व्यक्त किया एवं छात्रों को यह सलाह दी कि वे अपने शिक्षकों के जीवन अनुभवों और ज्ञान से सीखें, और जीवन में सार्थकता के साथ उपयोग करें जो शिक्षकों के प्रति आदर और सम्मान की भावना को मजबूती से सिद्ध करता है। डॉ. गुप्ता का भाषण शिक्षकों के प्रति गहरे सम्मान और आदर की भावना की दिशा में एक सफल प्रमाण रहा।
डॉ. मृदुला सिंह , सहायक डीन शैक्षणिक और अध्यक्षा आईक्यूएसी, कोर विश्वविद्यालय, ने आधिकारिक समन्वय किया । डॉ. रश्मि गुप्ता ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस कार्यक्रम में डॉ. देवेंद्र कुमार , प्रवेश निदेशक, डॉ. मनीष माथुर, कुलसचिव, डॉ. हिमांशु चौहान, परीक्षा नियंत्रक, सहायक प्रोफेसर रोहित चौहान विभिन्न विश्वविद्यालय विभागों के डीन, विभाग अध्यक्ष और 204 शिक्षकों के उपस्थिति थी। शिक्षक दिवस के समारोह ने शिक्षकों के योगदान की महत्वपूर्ण योगदान को सार्थक बनाया और छात्रों और शिक्षकों के बीच गहरी कृतज्ञता और प्रशंसा की भावना को प्रबलित किया।








