कॉलोनी वासियों का आरोप है कि टाइल्स वाली सड़कें टिकाऊ नहीं होतीं और कुछ ही महीनों में टूट-फूट का शिकार हो जाती हैं। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में टाइल्स उखड़ जाती हैं, जिससे पानी भराव और कीचड़ की समस्या बढ़ जाती है। इससे न केवल राहगीरों को परेशानी होती है, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि बार-बार मरम्मत कराने से सरकारी धन की भी बर्बादी होती है।प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि संजय गांधी कॉलोनी एक घनी आबादी वाला क्षेत्र है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। ऐसे में यहां मजबूत और लंबे समय तक टिकने वाली सीमेंट-कंक्रीट सड़क का निर्माण होना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिना स्थानीय लोगों की राय लिए ही टाइल्स लगाने का निर्णय लिया गया, जो पूरी तरह गलत है।विरोध के दौरान कॉलोनी वासियों ने संबंधित विभाग और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और कार्य को तत्काल रोकने की मांग की। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके का निरीक्षण कर टाइल्स की जगह सीमेंट की सड़क बनाने का आदेश दिया जाए, ताकि क्षेत्र में स्थायी समाधान हो सके। फिलहाल मामले को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन विरोध के चलते निर्माण कार्य प्रभावित होता नजर आ रहा है।
रुड़की के संजय गांधी कॉलोनी में सड़क निर्माण कार्य को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कॉलोनी में बनाई जा रही सड़क पर इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाने के फैसले का स्थानीय निवासियों ने खुलकर विरोध किया है।






