विदेशी भी हुए हिंदी कविता के मुरीद

आई आई टी रुड़की में कार्यशाला के समापन पर काव्यगोष्ठी

रुड़की । आई आई टी रुड़की में मल,कीचड़, पर्यावरण सुरक्षा व जल सरक्षंण विषय पर दो दिवसीय वर्कशॉप के समापन तथा हिंदी दिवस पखवाड़ा के अवसर पर देश विदेश से आये वैज्ञानिकों के सम्मान में विशेष “काव्य संगोष्ठी” का आयोजन हरिद्वार रोड स्थित एक रिसोर्ट में किया गया जिसमें विभिन्न भाषाओं के कवियों ने काव्य पाठ किया।जर्मनी,जापान, इंडोनेशिया, श्रीलंका आदि देशों के सहभगियो ने हिंदी, उर्दू,पंजाबी और अन्य भारतीय भाषाओं की रचनाओं का भरपूर आनंद लिया।विदेशी मेहमानों के लिए भारत सरकार द्वारा दुभाषियों की व्यवस्था की गई थी । काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता जर्मनी से आये वैज्ञानिक डॉ वोल्फ गैंग ने की ।जापान से आई युवा वैज्ञानिक व शोधकर्ता कु सोगा युकरनो व जापान के ही डा सैकि काज़ुओ ने कहा कि भारतीयों की सब कलाओं को जापान में बहुत पसंद किया जाता है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में रायवाला पुलिस कोतवाली के एस एच ओ देवेंद्र सिंह चौहान ने बंग्लादेश की हिंसा पर करारा प्रहार करते हुए अपनी कविता के माध्यम से संदेश दिया।उत्तराखंड की प्रसिद्ध कवियत्री अरुणा वशिष्ठ ने पर्यावरण को बचाने में “पेड़ों की पीड़ा”कविता प्रस्तुत की।कार्यक्रम के संयोजक नमामि गंगे व अंतरराष्ट्रीय जल सरक्षंण विशेषज्ञ प्रोफेसर ए ए काज़मी ने कहा कि यदि जीवन को रोगमुक्त रखना है तो हमको स्वच्छ जल व पर्यावरण सरक्षंण के लिए समर्पित होना होगा ।आज विदेशी भी हमारी गंगा और देवभूमि के पर्यावरण को विश्व में सबसे शुद्ध मानते हैं मगर हम इनके सरक्षंण के लिए गम्भीर नही।

काव्यगोष्ठी का संचालन करते हुए उत्तराखंड उर्दू अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष ,अंतरराष्ट्रीय शायर अफ़ज़ल मंगलोरी ने “हिमालय की पीड़ा” मैं हूं हिमालय मौन खड़ा हूँ वर्षो से कविता प्रस्तुत की।

इसके अलावा जयपुर की डा सुदीप्ति अरोरा, ग्वालियर के डा ए के गोयल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के डा नदीम खलील,प्रो वाई एस राव,गुड़गांव के कमल तिवारी, सिंटेक्स के अमित शाह, लक्षयदीप के मो मोहसिन,अंकुर राजपाल, विनय कुमार त्यागी, सुशील कुमार, पीयूष गोस्वामी, व अनुराग तोमर आदि ने रचनाएं प्रस्तुत की ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

Samarth Bharat News