
रुड़की। गुरुद्वारा सत्संग सभा (सिविल लाइन, जादूगर रोड) में खालसा पंथ के सिरजना दिवस बैसाखी पर्व को श्रद्धा, उत्साह और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। गुरुद्वारा साहिब में सजे भव्य कीर्तन दरबार में दूर-दूर से आई संगत ने भाग लेकर गुरबाणी का आनंद लिया।
कीर्तन दरबार में भाई कमलजीत सिंह जी (दिल्ली वाले) एवं भाई नितिन सिंह जी ने अपनी मधुर वाणी से कीर्तन कर संगत को भाव-विभोर कर दिया। उनके द्वारा प्रस्तुत शबद-कीर्तन से पूरा दरबार “वाहेगुरु” के नाम से गुंजायमान हो उठा।

कीर्तन उपरांत अरदास कर देश की सुख-समृद्धि, अमन और शांति की कामना की गई। इसके बाद गुरु का अटूट लंगर बरताया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रबंधक सरदार हरमीत सिंह दुआ ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि बैसाखी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण और धर्म की रक्षा का संदेश देने वाला ऐतिहासिक दिवस है। उन्होंने कहा कि खालसा पंथ की स्थापना मानवता, समानता और साहस का प्रतीक है। हमें गुरुओं की शिक्षाओं पर चलते हुए समाज में भाईचारा और सेवा भावना को बढ़ावा देना चाहिए।इस अवसर पर हरमिंदर पाल सिंह दुआ, अवतार सिंह चौधरी, इंदर बधान, सुरजीत सिंह बक्शी, अजीत सिंह सेठी, सिमरजोत सिंह, जसप्रीत सिंह, अमनप्रीत सिंह, गगनदीप Singh, कुलदीप सिंह, तरणप्रीत सिंह दुआ, जतिंदर सिंह, रंजीत सिंह, सजल सचदेवा, राजेंद्र सिंह मारवाह, अमरजीत सिंह, सतबीर सिंह सहित बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही।






