
बताते चलें रुड़की शहर की मुख्य धारा को जोड़ने वाले शहर में चार पुल गंग नहर पर बने हैं लेकिन कुछ आयोजन करता द्वारा जिसमें प्रशासन एवं सरकारी तंत्र सम्मिलित है के द्वारा एक क्रॉस कंट्री दौड़ का आयोजन किया गया और आयोजन कर्ताओं द्वारा संचालित इस दौड़ में यह ध्यान नहीं रखा गया की चारों पुलों को शहर की मुख्य धारा से एकदम विच्छेद कर दिया गया। अब समझ में नहीं आता है कि इस रूपरेखा को तैयार किसके द्वारा किया गया। आज सुबह लगभग 7:00 बजे यह दौड़ आरंभ की गई। जबकि इस प्रकार की जो दौड़ होती है उसका समय प्रातः काल 5:00 बजे या 6:00 बजे होना चाहिए। 7:00 बजे दौड़ प्रारंभ करने के पश्चात लगभग 3 घंटे 10:00 बजे तक यह दौड़ चलती रही। और रुड़की शहर को जोड़ने वाले चारों पुल जाम कर दिए गए। जिसके कारण बहुत से लोगों को असुविधा उठानी पड़ी। बहुत से लोग अपनी ड्यूटी नहीं कर पाए और अधिकतर रविवार के दिन बहुत सी प्रतियोगिता परीक्षाएं होती हैं। अभिभावक परेशान रहे और बहुत से बच्चों की प्रतियोगिता परीक्षाएं नहीं हो पाई। इसका भुगतान क्या प्रशासन या आयोजन करता कर पाएंगे। अगर इसी दौड़ को आप लोगों को नहर किनारे वाली पटरी पर ही करना है तो कृपया इसका एक स्थान निश्चित नहीं करना चाहिए। क्या नगर निगम से लेकर मेवड़ पुल या कलियर तक भी यह दौड़ समाप्त की जा सकती है। मगर नहीं गणेशपुर पुल से लेकर नगर निगम पुल तक सभी मार्ग बाधित कर दिए गए क्या आयोजन करता अपने सामने सभी को तुच्छ समझते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को भी संज्ञान लेना चाहिए क्या इस प्रकार के आयोजन शहर के बीचो-बीच करने चाहिए या केवल तानाशाही चलेगी जिन लोगों का नुकसान हुआ है उनकी भरपाई कौन करेगा। न शासन करेगा न प्रशासन करेगा लोग बाग जिनमें मुख्य रूप से मजदूर नौकरी पैसा और तो और आजकल मौसम थोड़ा गर्म होने लगा तो दूध वाला जिसका दूध खराब हो सकता है या जिनके घरों में मिठाइयां बननी है शादी के कारण उनका कच्चा माल अगर 3 घंटे सड़क पर खड़ा रहेगा तो क्या वह खराब नहीं होगा और अगर इस व्यवस्था के तहत किसी बच्चे का कैरियर खराब होता है और अगर किसी का मरीज दम तोड़ देता है तो जवाबदेही किसकी होगी। अगर बात की जाए व्यवस्था कर्मियों से तो उनका कहना है कि हमारे पास तो ऊपर से आर्डर है जनता को सही जवाब कौन देगा। ऐसी दौड़ या इस प्रकार के आयोजन के लिए क्या आयोजन कर्ताओं को किसी ग्राउंड या सीमित दायरे का उपयोग नहीं करना चाहिए। जनता के सवाल हैं शासन और प्रशासन को जवाब देना चाहिए।