भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को करारा जवाब अमेरिका बुलाए गए आमंत्रण को किया अस्वीकार।

भारत की जनता जिस थप्पड़ की बहुत विकलता से प्रतीक्षा कर रही थी आखिर वह थप्पड़ मोदी ने ट्रम्प को जड़ ही दिया और वह भी तीन बार, दो बार प्रत्यक्ष और एक बार अप्रत्यक्ष।

1)अप्रत्यक्ष थप्पड़:- मोदी ने मेक्रो के पास जाकर हँसते हुये बोला कि आजकल वह ट्विटर (X) पर लड़ रहे हैं। वस्तुतः यह ट्रम्प का मजाक उड़ाना था जो समान्यतः कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ नहीं करता बल्कि मेरा तो मानना था कि उसमें ‘उस बेवकूफ के साथ’ सायलेंट था। 2) जब ट्रम्प ने फोन पर मोदी से बात की और उन्हें वाशिंगटन आने का न्योता दिया तो पहले से ही सुनाने को भरे बैठे मोदी ने बिना लाग लपेट के सीधे पूछ लिया कि पहले ये बताये कि हमारी बातचीत ट्रेड, युद्धविराम के ऊपर कब हुई जबकि ऑपरेशन सिंदूर तो अभी भी जारी है। 3)खिसियाये ट्रम्प ने मोदी को वाशिंगटन आने का निजी न्योता दिया(सम्भवतः मनाने के लिए) तो मुनीर की अमेरिका में उपस्थिति से क्रुद्ध मोदी जी ने स्पष्टतः ना बोलकर तीसरा थप्पड़ जडा। क्योंकि सामान्यतः अमेरिकी राष्ट्रपति के न्योते ऐसे नहीं ठुकराये जाते। अगर ठेठ गंवार भाषा में इस इनकार का सीधा अनुवाद किया जाए तो वह कुछ ऐसा होगा — “भाड़ में जाओ तूम। तुमको तो अपनी इज्जत की परवाह है नहीं जो अपने से बहुत नीचे के पद के अधिकारी से मिलकर राष्ट्रपति पद की गरिमा धूल में मिला रहे हो, पर मैं ऐसे आदमी से नहीं मिलूँगा जो 140 करोड़ के देश के प्रतिनिधि और एक ‘नौकर’ में अंतर नहीं समझता।” जी हाँ, सम्भवतः ट्रम्प अनोपचारिक रुप से मुनीर को मोदी के साथ खड़ा करने की डिप्लोमेसी खेल रहे थे। जिसे भारतीय पक्ष ने ताड़ लिया। इतिहास में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिका की प्रतिष्ठा को इतना नहीं गिराया होगा जितना ट्रम्प ने और इतना सीधा स्पष्ट व कठोर उत्तर भी शायद ही किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने दिया हो।

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