विश्व पटल पर उत्तराखण्ड राज्य की पहचान को सुदृढ बनाने के उद्देश्य से राजकीय महाविद्यालय मंगलौर ने आज गढ़मोज दिवस का आयोजन किया गया ।

विश्व पटल पर उत्तराखण्ड राज्य की पहचान को सुदृढ बनाने के उद्देश्य से राजकीय महाविद्यालय मंगलौर ने आज गढ़मोज दिवस का आयोजन किया गया ।महाविद्यालय सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम की संयोजक डॉ० कलिका काले ने बताया कि मॅडुवा का ग्लाइसीमिक इन्डेक्स बहुत कम होने के कारण सुपाच्य है। इसके अतिरिक्त गढ़वाली व्यंजन जैसे थेंचवाणी आदि लोकप्रिय होने के साथ पौष्टिकता से भरपूर है। शिक्षणेत्तर स्टाफ से श्रीमती गीता जोशी ने बताया कि पहाड़ी व्यंजन कम मसाले परन्तु अधिक स्वाद प्रदान करते है। कार्यक्रम के संचालक श्री प्रवेश त्रिपाठी ने बताया कि मोटे अनाज आज के समय की जरूरत है। वहीं अर्थशास्त्र विभाग से डॉ० रचना वत्स ने बताया कि समय के अनुसार अब मंडुवा के बिस्किट, केक इत्यादि भी स्टार्टअप के जरिये उपलब्ध है। समाजशास्त्र विभाग प्रभारी डॉ० दीपा शर्मा ने पहाड़ के पारम्परिक व्यंजनो के स्वाद एवं उनकी विधि पर चर्चा करी। अंग्रेजी विभाग प्रभारी डॉ० प्रज्ञा राजवंशी ने अपनी जड़ो की ओर लौटने एवं वोकल फोर लोकल सिद्धान्त को अमल में लाने की प्रेरणा दी। महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ० तीर्थ प्रकाश ने बताया कि झंगोरा, कोदो आदि गढ़वाली व्यंजनों के औषधीय गुण एंव पौष्टिकता ही उन्हें लोकप्रिय बनाती है। उन्होने चेताया वर्तमान पीढ़ी का जंक फूड के प्रति लगाव खतरनाक स्तर तक पहुँच चुका है। ऐसे में उन्हें प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिए मोटे अनाजों को प्रतिदिन के भोजन में शामिल करना अनिवार्य हो गया है।राज्य सरकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्री द्वारिका प्रसाद सेमवाल की पहल पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में सभी छात्र / छात्राओं ने उत्सुकता पूर्वक अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया साथ ही उनको बनाने की विधि जानने में भी रूचि दिखायी।

Samarth Bharat news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Samarth Bharat news