
हरिद्वार। शारीरिक शिक्षा के बिना खेलों का अस्तित्व केवल मात्र स्वप्न है। खेल तथा खिलाडियों के लिए शारीरिक शिक्षा एकमात्र आधार तय करने की सशक्त विद्या हैं। गुरुकुल कांगडी समविश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग के दयानंद स्टेडियम प्रांगण के मेजर ध्यान चन्द सभागार मे आयोजित विशेष व्याख्यान मे फिजिकल एजूकेशन फाउन्डेशन आॅफ इण्डिया के महासचिव तथा लवली प्रोफेशन विश्वविद्यालय, फग्वाडा के प्रोफेसर इन प्रेक्टिस डाॅ0 पीयूष जैन ने शारीरिक शिक्षा एवं खेल के प्रशिक्षुओं को सम्बोधित किया। अपने व्याख्यान मे डाॅ0 पीयूष जैन ने भारत मे आगामी दशक मे ओलम्पिक आयोजन की तैयारियों, पैटर्न, पाॅलिसी तथा प्रिपरेशन पर चर्चा की। इससे पूर्व विभाग के प्रभारी डाॅ0 अजय मलिक ने डाॅ0 पीयूष जैन का परिचय कराते हुये उनके योगदान पर प्रकाश डाला। अपने व्याख्यान मे डाॅ0 जैन ने कहाॅ कि लम्बे समय तक शारीरिक शिक्षा को स्पोटर्स न मानने का मिथक अब दूर होता जा रहा है। लम्बे समय तक शारीरिक शिक्षा विषय शिक्षा मंत्रालय के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। जिसके कारण शारीरिक शिक्षा न ही शिक्षा ओर न ही खेल मे स्थायित्व प्राप्त करने मे सफल हो सकी। लेकिन वर्तमान नरेन्द्र मोदी सरकार ने इस दिशा मे सार्थक पहल करते हुये इस मिथक को दूर करके देश मे खेल, खिलाडी तथा खेल सुविधाओं मे अग्रणी क्रान्ति लाने तथा शारीरिक शिक्षा को विशेष दर्जा देने का काम किया है जिसके कारण देश के यूथ आज खेलों मे बेहतर मुकाम एवं निरन्तर उन्नति कर रहे है। कार्यक्रम का संचालन करते हुये डाॅ0 शिवकुमार चैहान ने शारीरिक शिक्षा की खेलो मे मजबूती से वकालत करते हुये एक खिलाडी को बेहतर खिलाडी बनने मे शारीरिक शिक्षा के वैज्ञानिकों प्रकल्पों पर भी ध्यान देने पर जोर दिया। उन्होने कहाॅ कि वैज्ञानिक तथ्यों पर खरा उतरने के बाद ही खिलाडी खेल मे उत्कृष्ठता प्राप्त करने मे सफल होता है।
इस अवसर पर विभागीय आई0क्यू0ए0सी0 प्रभारी डाॅ0 कपिल मिश्रा, डाॅ0 अनुुुज कुमार, डाॅ0 प्रणवीर सिंह, मीडिया सैल के अध्यक्ष डाॅ0 अजीत तोमर, जनसम्पर्क अधिकारी डाॅ0 शिवकुमार, कुलभूषण शर्मा, अश्वनी कुमार, कुलदीप रतूडी, सुरेन्द्र सिंह, राजेन्द्र सिंह, कुलदीप आदि उपस्थित रहे। व्याख्यान सत्र मे एम0पी0एड0, बी0पी0एड0 तथा बी0पी0ई0एस0 के प्रशिक्षुओं ने कैरियर की दृष्टि से शारीरिक शिक्षा मे सम्भावनायें, निश्चितता, चुनौतियों एवं नये अवसरो से जुडे अपने प्रश्नों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। शान्तिपाठ के साथ व्याख्यान सत्र सम्पन्न हुआ।







