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विधायक आदेश चौहान समेत आरोपितों को बरी किया सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के निर्णय पर्याप्त साक्ष्य के आधार पर नहीं माना

देहरादून। सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के निर्णय को निरस्त करते हुए विधायक आदेश चौहान सहित सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। यह फैसला 30 मार्च 2026 को सुनाया गया।

मामले की शुरुआत एक पारिवारिक विवाद से हुई थी, जिसमें धीर सिंह और उनके परिवार ने आरोप लगाया था कि उन्हें पुलिस और प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और मारपीट की गई। इस संबंध में विभिन्न धाराओं—धारा 498A, 323, 504 तथा अन्य गंभीर आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया था।

प्रारंभिक जांच स्थानीय पुलिस द्वारा की गई, जिसके बाद मामला आगे की विवेचना के लिए सीबी-सीआईडी (CB-CID) को सौंपा गया। जांच के उपरांत सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया गया और मामला विशेष मजिस्ट्रेट की अदालत में चला।

निचली अदालत ने 26 मई 2025 को अपना फैसला सुनाते हुए विधायक आदेश चौहान सहित अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 120B, 109, 342, 385 और 506 के तहत दोषी मानते हुए अधिकतम 6 माह के कारावास और 1000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी।

इस फैसले के खिलाफ विधायक आदेश चौहान और अन्य आरोपियों ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं उत्तम सिंह, अमित चौहान और दिविक चौहान ने विस्तृत कानूनी बहस प्रस्तुत की और निचली अदालत के फैसले को त्रुटिपूर्ण बताया।

सत्र न्यायालय ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों की पुनः समीक्षा के बाद पाया कि निचली अदालत का निर्णय पर्याप्त साक्ष्यों पर आधारित नहीं था। इसी आधार पर अदालत ने पूर्व निर्णय को निरस्त करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

Samarth Bharat News

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