
होली के पावन पर्व पर नवशियेष्टी यज्ञ आर्य समाज रामनगर रुड़की में आचार्य बिहारी लाल जी द्वारा होली के विशेष मंत्रों से संपन्न कराया गया ।यज्ञ में राजकुमार जी और उनकी पत्नी ममता जी को यज मान बनाकर यज्ञ सम्पन्न किया गया । आचार्य द्वारा अपने सम्बोधन में कहा गया कि धर्म अर्थ काम मोक्ष मनुष्य जीवन का आधार है। इसकी प्राप्ति के लिए यज्ञ करते है हमारी संस्कृति यज्ञमय है देवो को समर्पित करने के यज्ञ किया जाता है वैदिक काल से ही शस्य (फसलो ) से जो प्राप्त होता था सर्वप्रथम चौराहो पर आम चंदन प्लास के अग्नि जलाकर फसल का सर्मपण कर देवो को प्रदान किया जाता रहा है जिसे होला कहते थे फसल का हिस्सा गुरुकूल आचार्य ब्रहमचारी योगी तथा धर्मालयो को भी वितरित किया जाता था। फालगुण मास की पूर्णिमा पर होली एक महत्वपूर्ण समाज सगठन का पर्व है। उन्होंने कहा कि पर्व त्यौहार उत्सव भारतीय समाज की रीढ है। इन्हे मौलिक स्वरूप में मनाकर समाज में फैली कुरीतियो को रोकना चाहिए। चैत्र शुक्ल वर्ष प्रतिपदा पर सृष्टि की उत्पति हुई । उन्होने कहा कि आर्य समाज संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती ने वेदो की ओर लौटो का नारा देकर देश धर्म संस्कृति रे संरक्षण एवं स वर्धन का मार्ग प्रशस्त किया । देश की स्वतन्त्रता का विगुल बजाया । उन्होंने कहा कि प्रहलाद एवं होलिका के अग्नि प्रवेश से होली का प्रचलन प्रारम्भ हुआ। इस अवसर पर आर्य समाज बी टी गंज के प्रधान उदयवीर सिंह यादव ,मंत्री सतीश जी, हरफूल सिंह राठी, आभा, आर्य समाज रामनगर के प्रधान ऋषिपाल सिंह चौहान, मंत्री यशवंत सिंह, उपप्रधान संदीप यादव ,कोषा अध्यक्ष विराज सैनी, आनंद राणा, आरसी शर्मा, विपिन, ज्ञान सिंह ,एसके शर्मा, केपी चौहान ,चौधरी यसवीर सिंह , सोनी कुमार, जय देव आर्य, सहदेव सिंह पुंडीर ,संगीता मिनोचा, रामेश्वर प्रसाद, विपुल चौधरी, सरोज जी अपने परिवार सहित उपस्थित रहेl









