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सम्मेद शिखर आस्था का प्रतीक है ना कि पर्यटक स्थल* *दीपक गम्भीर

*सम्मेद शिखर आस्था का प्रतीक है ना कि पर्यटक स्थल* *दीपक गम्भीर*

*मुजफ्फरनगर* भाजपा सरकार हमेशा धर्म की आड़ में विवादों को जन्म देती आ रही है भाजपा सरकार केवल एक धर्म विशेष की राजनीति करती है।जबकि देश में सभी धर्म जाति वर्ग के लोग निवास करते हैं।इसलिए भारत को अखंड भारत कहा जाता है।लेकिन मोदी सरकार इस अखंड भारत को खंड खंड करने में लगी हुई है। भाजपा सरकार द्वारा जैन धर्म की आस्था का प्रतीक सम्मेद शिखरजी को पर्यटक क्षेत्र घोषित करने की वाल्मीकि क्रान्ति दल कडी निंदा करता है।यह पहला मामला नहीं है इससे एक वर्ष पूर्व मे शहर मुजफ्फरनगर में वाल्मीकि समाज की आस्था का प्रतीक रामायण रचयिता भगवान वाल्मीकि चौराहे को भाजपा सरकार द्वारा तोड़ा गया था। जिससे वाल्मीकि समाज की भावनाऐ आहत हुई थी। जैन धर्म के अनुसार विश्व प्रसिद्ध सम्मेद शिखर जहां पर जैन धर्म के ऋषि मुनियों ने कठोर तप कर मोक्ष प्राप्त किया और जहाँ भगवान पार्श्वनाथ ने भी निर्वाण प्राप्त किया हो ऐसी सर्वश्रेष्ठ पावन तपोस्थली भूमि को पर्यटक स्थल का नाम देना धर्म व धर्म को मानने वालों का अपमान है। यदि धार्मिक स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाएगा तो जैन समाज के मान सम्मान वह धर्म की हानि होगी और श्रद्धालुओं के मन से जैन धर्म के तपस्वियो के प्रति श्रद्धा खत्म होती जाएगी।धर्म केवल एक पूजा पद्धति ही नहीं जीवन जीने का आधार है धर्म मनुष्य को संस्कारवान बनाता है।हम सरकार को चेताना चाहते है कि यदि विश्व प्रसिद्ध आस्था का प्रतीक सम्मेद शिखर का नाम बदलकर पर्यटक स्थल किया गया तो वाल्मीकि क्रांति दल जैन समाज के साथ खड़ा होकर सरकार के खिलाफ आंदोलन करेगा।और भारत का संविधान किसी को भी किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं देता।

                *दीपक गम्भीर चीफ वाल्मीकि क्रान्ति दल*

समर्थ भारत न्यूज़
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