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दिनांक 23 मार्च 2026 को दि इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), रुड़की लोकल, सेंटर, आई. आई. आई. टी. परिसर, रुड़की द्वारा जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन विभाग, आईआईटी रुड़की 

दिनांक 23 मार्च 2026 को दि इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), रुड़की लोकल, सेंटर, आई. आई. आई. टी. परिसर, रुड़की द्वारा जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन विभाग, आईआईटी रुड़की 

में आयोजित कार्यक्रम में सेंटर के अध्यक्ष श्री अखिलेश वर्मा द्वारा सभी कॉर्पोरेट सदस्य और विशेषज्ञ, दर्शकों का स्वागत कर बताया गया कि

विश्व जल दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा हर साल 22 मार्च को मनाया जाता है,लेकिन 22 मार्च को रविवार होने के कारण इसे आज *23 मार्च* को मनाया गया।

मुख्य वक्ता प्रोफेसर सुरेंद्र कुमार मिश्रा ने विश्व जल दिवस, जल, समानता, पहुंच, नेतृत्व और स्थिरता पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि विश्व जल दिवस

का उद्देश्य पानी के महत्व को उजागर करना और जल संबंधी मुद्दों पर वैश्विक कार्रवाई को बढ़ावा देना है, जल सबका अधिकार है, सशक्तिकरण करें, भविष्य को सुरक्षित करें।। *विश्व जल दिवस 2026* का विषय “जल और लैंगिक समानता” है, जिसे अक्सर “जहां जल बहता है, वहां समानता बढ़ती है” अभियान के नारे के साथ व्यक्त किया जाता है। यह विषय जल तक पहुंच, स्वच्छता और लैंगिक समानता के बीच अंतर्संबंध पर केंद्रित है और जल की कमी के महिलाओं और लड़कियों पर पड़ने वाले असमान प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित करता है। यह विषय सतत विकास लक्ष्य 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) और सतत विकास लक्ष्य 5 (लैंगिक समानता) को प्राप्त करने के प्रयासों के साथ तालमेल बिठाने पर जोर देता है। यह विषय निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डालता है: महिलाएं और लड़कियां अपने घरों के लिए पानी लाने की जिम्मेदारी असमान रूप से उठाती हैं, अक्सर उन्हें प्रतिदिन लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे शिक्षा, काम, आराम और सामुदायिक जीवन में भागीदारी के लिए उनका समय कम हो जाता है। सुरक्षित स्वच्छता और साफ-सफाई सेवाओं तक पहुंच भी एक लैंगिक मुद्दा है। निजी और सुरक्षित सुविधाओं की कमी से उत्पीड़न का खतरा बढ़ जाता है और महिलाओं की गरिमा, स्वास्थ्य और मासिक धर्म एवं गर्भावस्था को निजता और सुरक्षा के साथ संभालने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विश्व के अधिकांश जल संबंधी श्रम का निर्वाह करने के बावजूद, जल नीतियों, शासन और अवसंरचना से संबंधित नेतृत्व भूमिकाओं और निर्णय लेने में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अक्सर कम होता है। 

कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर अंशुल यादव द्वारा किया गया।

अंत में केन्द्र के मानद सचिव डाॅ. सोजू द्वारा सभी प्रोफेसर एस.एस. जैन, प्रो0 एम. आर. मौर्य, श्री अभिषेक गुप्ता कार्यकारी समिति के सदस्य, एन.आई.एच. के वैज्ञानिक दिगाबर और छात्रों और श्रोताओं को धन्यवाद अर्पित किया गया।

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