
रुड़की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान स्थित ‘दि इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के परिसर में ‘विश्व इंजीनियरिंग दिवस’ के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने भविष्य के इंजीनियरों को वैश्विक मानकों पर तैयार करने के लिए एयरोस्पेस और ड्रोन तकनीक में नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए सेंटर के अध्यक्ष अखिलेश वर्मा ने सभी कॉर्पोरेट सदस्यों और विशेषज्ञों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान, नवाचार और प्रायोगिक प्रशिक्षण ही वे माध्यम हैं जिनसे भविष्य के इंजीनियरों को वैश्विक एयरोस्पेस उद्योग की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सकता है। उन्होंने उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता को अनिवार्य बताया।

इस अवसर पर इंडोप्लैनेटएक्स स्पेस वॉल्ट एंड रिसर्च प्रा. लि. के सीईओ एवं संस्थापक अंकित कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में “ड्रोन और रॉकेट तकनीक में उद्योग-केंद्रित आवश्यकताएँ: एक आई ओपनर” विषय पर अपना व्याख्यान दिया। अंकित कुमार ने तकनीकी शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा की आज एयरोस्पेस, ड्रोन और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है, लेकिन उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं और पारंपरिक इंजीनियरिंग शिक्षा के बीच अभी भी एक बड़ा अंतर मौजूद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक उद्योगों को अब ऐसे इंजीनियरों की तलाश है जो केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न हों, बल्कि जिनके पास सिस्टम इंटीग्रेशन, एवियोनिक्स, प्रोपल्शन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ( एआई) जैसी तकनीकों की व्यावहारिक समझ हो।
व्याख्यान के दौरान स्वायत्त ड्रोन और उनकी कार्यप्रणाली, आधारित मैपिंग तकनीक, हाइड्रोजन फ्यूल सेल से संचालित यूएवी, सेमी-क्रायोज रॉकेट इंजन का विकास आदि भविष्य की तमाम कई क्रांतिकारी तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया के कार्यकारी सदस्य, सी.बी.आर.आई. के फैकल्टी व स्टाफ और राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान , रुड़की के वैज्ञानिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के अंत में केंद्र के मानद सचिव डॉ. सोजू द्वारा सभी उपस्थित अतिथियों और श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।






