
Sejjil Missile vs Brahmos: वेस्ट एशिया में भड़की युद्ध की आग की ज्वाला मद्धिम पड़ने के बजाय और धधकती ही जा रही है. ईरान ने अमेरिका और इजरायल के सामने घुटने टेकने से साफ इनकार कर दिया.दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान को बिना किसी शर्त के सरेंडर करने को कह रहे हैं. इन सबके बीच अमेरिका-इजरायल और ईरान एक-दूसरे पर लगातार हवाई हमले कर रहे हैं. दोनों पक्षों की ओर से तमाम तरह के दावे किए जा रहे हैं. ईरानी शाहेद ड्रोन ने अमेरिका और इजरायल की नाक में दम कर रखा है तो वहीं अमेरिकी और इजरायली मिसाइलें जमकर तबाही मचा रही हैं. तेहरान की ओर से किए गए हमले में अरब देशों में स्थित अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों को व्यापक पैमाने पर नुकसान पहुंचा है. वेस्ट एशिया में छिड़ जंग से ऊर्जा संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है. होर्मुज स्ट्रेट के बाधित होने से तमाम एशियाई देशों में पेट्रोलियम उत्पादों और LPG की आपूर्ति प्रभावित हुई है. पूरी दुनिया इस युद्ध के खत्म होने की उम्मीद लगाए हुए है, ताकि डगमगा रही अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिल सके. लेकिन पश्चिम एशिया में टकराव हर दिन नया मोड़ ले रहा है. अब ईरान ने दावा किया है कि उसने बेहद खतरनाक सेजिल बैलिस्टिक मिसाइल से अमेरिका और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाया है. सेजिल मिसाइल कितना घातक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विशिष्ट खासियतों की वजह से इसे ‘डांसिंग मिसाइल’ के नाम से भी जाना जाता है. इस तरह सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल आग में घी का काम कर सकती है. अमेरिका की तरफ से टॉमहॉक जैसी खतरनाक मिसाइल्स से ईरान पर अटैक किया जा रहा है. तेहरान ने जिस सेजिल से अटैक किया है, क्या भारत के पास उस तरह की मिसाइलें हैं? सेजिल मिसाइल्स ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल से कितना खतरनाक है?
पहले ईरान की सेजिल मिसाइल की बात करते हैं. ईरान की मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल सेजिल-2 (Sejjil-2) अपनी उन्नत क्षमता और तेज तैनाती के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है. यह दो चरणों वाली ठोस ईंधन (सॉलिड-फ्यूल) से ऑपरेट होने वाली मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 2000 किलोमीटर तक मानी जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार यह लगभग 700 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है. सेजिल मैक 4 से मैक 5 (6000 KMPH से ज्यादा की स्पीड) की रफ्तार से अटैक करने में कैपेबल है. अमेरिका स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के मुताबिक मिसाइल की लंबाई करीब 18 मीटर, व्यास लगभग 1.25 मीटर और वजन लगभग 23600 किलोग्राम है. इसकी सबसे खास विशेषता उच्च ऊंचाई (High-Altitude) पर दिशा बदलने की क्षमता है, जिसके कारण इसे डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है. माना जाता है कि यह क्षमता मिसाइल रक्षा प्रणालियों (जैसे इजरायल के आयरन डोम) से बच निकलने में मदद कर सकती है. सेजिल-2 का ठोस ईंधन आधारित डिजाइन इसे रणनीतिक बढ़त देता है. ठोस ईंधन वाली मिसाइलों को पुराने तरल ईंधन वाले सिस्टम (जैसे शाहाब सीरीज) की तुलना में कम समय में तैयार कर लॉन्च किया जा सकता है. इस मिसाइल के विकास पर काम 1990 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ था. पहला परीक्षण प्रक्षेपण 2008 में हुआ, जिसमें मिसाइल लगभग 800 किलोमीटर तक गई. इसके बाद मई 2009 में बेहतर गाइडेंस और नेविगेशन सिस्टम के ट्रायल के लिए दूसरा प्रक्षेपण किया गया. साल 2009 के बाद चार और फ्लाइट ट्रायल हुए, जिनमें छठे परीक्षण के दौरान मिसाइल लगभग 1,900 किलोमीटर दूर हिंद महासागर तक पहुंची थी.
ब्रह्मोस बनाम सेजिल मिसाइल

ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल सेजिल बैलिस्टिक मिसाइल
ब्रह्मोस एक टू-स्टेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे भारत के Defence Research and Development Organisation (DRDO) और रूस के NPO Mashinostroyenia (NPOM) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है. सेजिल-2 ईरान की दो चरणों वाली ठोस ईंधन (सॉलिड-फ्यूल) आधारित मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी अनुमानित मारक क्षमता करीब 2,000 किलोमीटर और पेलोड क्षमता लगभग 700 किलोग्राम है.
ब्रह्मोस एक दो-चरणीय सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है, जिसे भारत के Defence Research and Development Organisation (DRDO) और रूस के NPO Mashinostroyenia (NPOM) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है. मिसाइल की उच्च ऊंचाई पर युद्धाभ्यास करने की क्षमता के कारण इसे डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है, क्योंकि यह मिसाइल रक्षा प्रणालियों जैसे Iron Dome को चकमा देने में सक्षम मानी जाती है.
ब्रह्मोस फायर एंड फॉरगेट सिद्धांत पर काम करती है, यानी लॉन्च के बाद इसे अतिरिक्त मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं होती. यह रडार से बचने के लिए लो-फ्लाइट और ‘S’ आकार की चालें भी चल सकती है. Center for Strategic and International Studies (CSIS) के अनुसार मिसाइल की लंबाई लगभग 18 मीटर, व्यास करीब 1.25 मीटर और कुल वजन लगभग 23,600 किलोग्राम है.
मिसाइल को लड़ाकू विमान Sukhoi Su-30MKI, भारतीय नौसेना के युद्धपोतों, पनडुब्बियों और सेना के भूमि-आधारित लॉन्चरों से दागा जा सकता है. इसकी मारक क्षमता सामान्यतः 290 से 450 किलोमीटर से अधिक तक है और इसमें करीब 200 किलोग्राम का कन्वेंशनल वॉरहेड लगाया जा सकता है. सॉलिड-फ्यूल तकनीक के कारण यह मिसाइल पुराने लिक्विड-फ्यूल सिस्टम वाली Shahab missile series की तुलना में तेजी से तैयार होकर लॉन्च की जा सकती है, जिससे इसे रणनीतिक बढ़त मिलती है.
नई पीढ़ी की ब्रह्मोस मिसाइलों की रेंज 450 किमी से अधिक तक बढ़ाई जा चुकी है. उत्तर प्रदेश के लखनऊ में नया उत्पादन केंद्र 2026 से हर साल लगभग 100-150 मिसाइल बनाने की क्षमता रखेगा, जबकि फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देश इसके प्रमुख ग्राहक बन रहे हैं. सेजिल मिसाइल के डिजाइन पर काम 1990 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ था. पहला परीक्षण 2008 में हुआ, जबकि 2009 में दूसरा परीक्षण बेहतर गाइडेंस सिस्टम के साथ किया गया. इसके बाद कई परीक्षण हुए, जिनमें छठे परीक्षण में मिसाइल ने करीब 1,900 किलोमीटर की दूरी तय की.
ब्रह्मोस मिसाइल कितना ताकतवर?
अब बात दुनिया की सबसे खतरनाक क्रूज मिसाइल में से एक ब्रह्मोस की. भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है. इसे भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की एनपीओएम कंपनी ने मिलकर तैयार किया है. दो चरणों वाली यह मिसाइल मैक 2.8 से 3.0 (तकरीबन 3600 KMPH स्पीड) की रफ्तार से उड़ान भरती है, जिससे मौजूदा मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए इसे रोकना बेहद कठिन माना जाता है. ब्रह्मोस ‘फायर एंड फॉरगेट’ सिद्धांत पर काम करती है, यानी लॉन्च के बाद इसे अतिरिक्त गाइडेंस की जरूरत नहीं होती. यह जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी से दागी जा सकती है. इसकी मारक क्षमता सामान्य तौर पर 290 से 450 किलोमीटर से अधिक तक है और यह लगभग 200 किलोग्राम का कन्वेंशनल वॉरहेड ले जाने में सक्षम है. इसकी रेंज 1500 किलोमीटर तक करने पर काम चल रहा है. मिसाइल की खासियत इसकी लो-लेवल ‘टेरेन हगिंग’ उड़ान और रडार से बचने के लिए किए जाने वाले ‘एस’ आकार के पैंतरे हैं, जो इसे दुश्मन की नजरों से बचाते हैं. भारतीय वायुसेना के सुखोई-30MKI लड़ाकू विमान, भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और सेना के लैंड बेस्ड लॉन्चर्स पर इसकी तैनाती की जा चुकी है. हाल के वर्षों में ब्रह्मोस के विस्तारित रेंज संस्करण का परीक्षण 450 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सफलतापूर्वक किया गया है.ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस का प्रचंड प्रहार
साल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के तहत सटीक हवाई कार्रवाई की. इस अभियान में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल मुख्य हथियार रही. बताया जाता है कि ऑपरेशन के दौरान सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमानों से कुल 19 ब्रह्मोस मिसाइलें दागी गईं, जिनका निशाना आतंकियों के कमांड सेंटर, रनवे और मजबूत सैन्य ठिकाने थे. करीब मैक 2.8 से 3.5 की गति से उड़ने वाली इस मिसाइल की फायर एंड फॉरगे क्षमता और उच्च सटीकता के कारण दुश्मन पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणालियां इसे रोक नहीं सकीं. अधिकारियों के अनुसार इस कार्रवाई से आतंकवादी ढांचे और उनकी संचालन क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा. पाकिस्तान का रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नूर खान एयरबेस को ब्रह्मोस ने व्यापक क्षति पहुंचाई. इसके अलावार परमाणु ठिकाने वाले किराना हिल्स भी इस क्रूज मिसाइल के अटैक से दहल उठी थी. ऑपरेशन की सफलता के बाद ब्रह्मोस मिसाइल की अंतरराष्ट्रीय मांग भी बढ़ी है. इंडोनेशिया सहित कई देश इसे खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं.






