
रुड़की। स्वामी विवेकानंद कॉलेज ऑफ एजुकेशन, रुड़की में अर्थशास्त्र विभाग एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को वर्तमान आर्थिक परिदृश्य तथा नई शिक्षा नीति के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराना था। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
संगोष्ठी के प्रथम सत्र में डी.एन. (पी.जी.) कॉलेज, गुलावठी, बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) के सहायक प्रोफेसर डॉ. भव्यनीत सिंह बत्रा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने ‘डिकोडिंग इंडियन बजट 2026: प्रायोरिटीज, प्रॉमिसेज, प्रॉस्पेक्ट्स’ विषय पर विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत के बजट 2026 की प्रमुख प्राथमिकताओं, सरकार की आर्थिक नीतियों, विकास योजनाओं तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान बजट देश के समग्र विकास, रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना के विस्तार तथा शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विद्यार्थियों को बजट की मूल अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाते हुए उन्होंने आर्थिक नीतियों के समाज और शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में भी जानकारी दी।

संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में डी.ए.वी. कॉलेज, मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुरेन्द्र पाल ने ‘एनईपी 2020: ट्रांसफॉर्मिंग इंडियन एजुकेशन फॉर द 21st सेंचुरी’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों और शिक्षा व्यव
विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख उद्देश्यों, उसकी संरचना तथा शिक्षा प्रणाली में होने वाले व्यापक बदलावों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों में रचनात्मकता, कौशल विकास और समग्र शिक्षा को बढ़ावा देती है। इसके माध्यम से शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, शोधपरक और रोजगारोन्मुख बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को नई शिक्षा नीति के विभिन्न आयामों से अवगत कराते हुए उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में आने वाले नए अवसरों के बारे में भी प्रेरित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विकास कुमार ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक संगोष्ठियाँ विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन तथा बौद्धिक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को समय-समय पर ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेकर समसामयिक विषयों की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए, जिससे उनका दृष्टिकोण व्यापक होता है। इस कार्यक्रम का संचालन संयोजक डॉ. रेनू कुमारी के निर्देशन में किया गया, जबकि सह-संयोजक डॉ. अमित कुमार ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए और उन्हें अपने विचार साझा करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की ओर से दोनों वक्ताओं का आभार व्यक्त किया गया तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक गण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
इस प्रकार यह संगोष्ठी ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रही, जिसने विद्यार्थियों को आर्थिक नीतियों एवं नई शिक्षा नीति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।








