
रादौर, 3 जनवरी: सैनी समाज की ओर से शनिवार को शहर के खेड़ा मोहल्ला में सावित्री बाई फुले की 196वीं जयंती मनाई गई। प्रधान संदीप सैनी के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में गांव टोपरा खुर्द के सरपंच देवेंद्र सिंह सैनी मुख्यातिथि के तौर पर उपस्थित हुए। मुख्यातिथि देवेंद्र सैनी व स्थानीय लोगों ने सावित्री बाई फुले के चित्र पर श्रद्धाजंलि भेंट की। इस अवसर पर प्रधान संदीप सैनी व मुख्यातिथि देवेंद्र सिंह सैनी ने बताया कि देश की पहली महिला शिक्षक, समाज सेविका सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले में स्थित नायगांव नामक छोटे से गांव में हुआ था। वह भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापिका थी। जब वह महज 9 वर्ष की थीं तो उनका विवाह 13 साल के ज्योतिराव फुले से कर दिया गया था। जिस समय सावित्रीबाई फुले की शादी हुई थी, उस समय वह अनपढ़ थीं। प्रथम भारतीय महिला शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले के जयंती दिवस को महिला शिक्षिका दिवस घोषित करने एवं महात्मा ज्योति राव फूले तथा सावित्रीबाई फूले को भारत देने की मांग की। इस अवसर पर सतीश सैनी ने बताया कि उनके पति तीसरी कक्षा में पढ़ते थे जिस समय सावित्रीबाई पढऩे का सपना देख रहीं थी। उस समय दलितों के साथ बहुत भेदभाव होता था। उन्होंने भारत सरकार से माता सावित्री बाई फुले को भारत रत्न देने की मांग की। इस अवसर पर सरपंच देवेंद्र सिंह सैनी, नितिन सैनी, अंकुश सैनी, शुभम सैनी, मास्टर अमित सैनी, सूरज सैनी आदि उपस्थित रहे।

रादौर- रादौर में सावित्री बाई फुले को नमन करते समाज के लोग।



























