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श्री भक्तमाल कथा में भक्ति की सर्वोच्च परम्परा को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया

रूड़की। श्री भवानी शंकर आश्रम, रुड़की में भव्य श्री भक्तमाल कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा वाचन श्री बीना शर्मा (भोपाल) द्वारा किया जा रहा है।
श्री भक्तमाल कथा के आज के सत्र में भक्ति की सर्वोच्च परम्परा को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। आज की कथा में विशेष रूप से जना बाई की पवित्र कथा का श्रवण कराया गया, जिसमें उनकी अनन्य भक्ति, समर्पण और निष्काम प्रेम को अत्यंत मार्मिक शैली में समझाया गया। कथावाचन में बताया गया कि जना बाई ने अपने आराध्य ठाकुर जी को अपना सर्वस्व मानते हुए उन्हें वह ओढ़नी भी ओढ़ा दी, जो स्वयं उनके पास थी, और स्वयं बिना किसी बिछौने या ओढ़ने के, सीधे ज़मीन पर सो गईं।
कथावाचक ने समझाया कि यह प्रसंग केवल त्याग का नहीं, बल्कि उस गहन प्रेम और अद्वितीय भक्ति-भाव का प्रतीक है, जिसमें भक्त अपने सुख-दुख की चिंता किए बिना केवल श्रीहरि की प्रसन्नता को सर्वोपरि मानता है।
उन्होंने बताया कि जना बाई का भाव यह था कि—‘जहाँ ठाकुर जी हैं, वही सबसे बड़ा वैभव है। अपना क्या है, सब कुछ उन्हीं का है।’ स्वयं के पास कुछ भी न होते हुए भी, उन्होंने ठाकुर जी की सेवा और प्रेम को ही वास्तविक धन माना। कथा के इस वृतांत ने उपस्थित भक्तजनों को भक्ति की सच्ची परिभाषा का गहरा संदेश दिया: भक्ति वह है जिसमें आत्म-अहम समाप्त होकर हृदय पूर्णतः प्रभु को समर्पित हो जाता है।
श्री भवानी शंकर आश्रम में जारी यह कथा आगामी दिनों में भी भक्तिभाव और प्रेरणा का संदेश देती रहेगी।
इस कार्यक्रम का आयोजन श्री महंत रीमा गिरी जी और श्री महंत त्रिवेणी गिरी जी के पर्यवेक्षण में हो रहा है ।

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