पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीती रात सहारनपुर से रिपोर्टिंग कर लौट रहे पत्रकार मोनू सैनी पर ईदगाह चौक से सुनहरा रोड की ओर अपने घर जाते समय एक सुनियोजित साजिश के तहत जानलेवा हमला हुआ।
घटना उस समय हुई रास्ते में एक दुकान के पास मौजूद 6 से 7 अज्ञात युवकों ने अचानक मोनू सैनी को घेर लिया। उन्होंने मोनू सैनी के साथ जमकर गाली-गलौज की और फिर बेल्ट व अन्य वस्तुओं से मारपीट शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर बेहद आक्रामक थे और उनके इरादे खतरनाक लग रहे थे।
हमले के दौरान मोनू सैनी किसी तरह जान बचाकर वहां से भागे और खुद को सुरक्षित किया। तुरंत ही उन्होंने गंगनहर कोतवाली पुलिस को कॉल कर सूचना दी। पुलिस रात में ही मौके पर पहुंची और मोनू को सुरक्षित घर तक पहुंचाया गया।
अगली सुबह मोनू सैनी ने थाने पहुंचकर FIR दर्ज कराई और मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें उनकी गंभीर चोटों की पुष्टि हुई है।
इस हमले से पूरे क्षेत्र में आक्रोश और दहशत का माहौल है। खासकर पत्रकारिता जगत में इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला माना जा रहा है। कई लोगों का मानना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि सच बोलने और उसे दिखाने की आज़ादी पर हमला है।
अब सवाल यह उठता है —
क्या मोनू सैनी पर हमला किसी व्यक्तिगत दुश्मनी का परिणाम था?
या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक या सामाजिक साजिश छुपी है?
पत्रकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है।
फिलहाल हमलावर फरार हैं और पुलिस जांच में जुटी है। अब देखना यह होगा कि पुलिस कितनी तेजी से आरोपियों तक पहुंचती है और पत्रकार मोनू सैनी को न्याय दिलाती है।