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उत्तराखंड में आरटीओ की कार्रवाई से मची खलबली, 17 स्कूली वाहनों और 79 अभिभावकों की गाड़ियों के चालान काटे

देहरादून। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर शुक्रवार को शहर में चलाए चेकिंग अभियान में परिवहन विभाग ने उन अभिभावकों की सरेआम प्रशंसा की जो खुद के साथ बच्चे को भी हेलमेट पहनाकर ले जा रहे थे।ऐसी कई महिलाएं मिलीं, तो चेकिंग टीम ने बाकी अभिभावकों को भी उनसे सीख लेने की सलाह दी। वहीं, चेकिंग अभियान में नियम तोड़ने वाले 17 स्कूली वाहनों के चालान किए गए। साथ ही बिना हेलमेट लगाए दुपहिया चला रहे या मोबाइल पर बात करते हुए कार चलाकर बच्चों को ले जा रहे 79 अभिभावकों के वाहनों के चालान भी किए गए।

आरटीओ (प्रवर्तन) डा. अनीता चमोला के निर्देश पर शुक्रवार को परिवहन विभाग की चार प्रवर्तन टीमों ने शहर में चेकिंग अभियान चलाया। ईसी रोड, सुभाष रोड, सहारनपुर रोड, चकराता रोड और राजपुर रोड पर चेकिंग अभियान के दौरान विभिन्न स्कूलों के बाहर प्रवर्तन टीमों ने स्कूली वाहनों की चेकिंग की गयी। चेकिंग के दौरान कई अभिभावक निजी वाहनों से बच्चों को ले जाते हुए मिले।

प्रवर्तन टीमों ने यह भी देखा कि कई अभिभावकों ने नियमों का पालन करते हुए खुद भी हेलमेट पहना हुआ है और सुरक्षा के दृष्टिगत बच्चे को भी हेमलेट पहनाया हुआ है। प्रवर्तन टीमों ने सभी जागरूक अभिभावकों की सराहना व अन्य को भी इस संबंध में जागरूक किया।

आरटीओ डा. चमोला ने बताया कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा अति महत्वपूर्ण विषय है, इसे सुनिश्चित किए जाने के लिए स्कूली वाहनों की चेकिंग को अभियान चलाया गया। यह अभियान आगे भी चलाए जाएंगे। आरटीओ ने इस दौरानअभिभावकों से भी अपील की है कि वह ओवरलोड स्कूल वाहनों में बच्चों को न भेजें। बच्चों को वाहन में भेजने से पहले जांच कर लें कि स्कूल वाहन में वैध लाइसेंस धारक चालक हो और वाहन के प्रपत्र वैध हों। अगर कोई अनियमितता करता है तो उसकी शिकायत परिवहन कार्यालय की जा सकती है। चेकिंग अभियान में अनुराधा पंत, श्वेता रौथाण, आनंद रतूड़ी, अरविंद भरत आदि शामिल रहे।

स्कूली वाहन चालकों के लिए गाइड-लाइन

चालक को न्यूनतम पांच साल का भारी वाहन चलाने का अनुभव होना जरूरी।

चालक का पुलिस चरित्र-सत्यापन व आपराधिक इतिहास की जानकारी अनिवार्य।

यदि चालक का परिवहन नियम तोड़ने पर पूर्व में दो बार चालान हुआ है तो स्कूली वाहन चलाने के लिए वह अयोग्य माना जाएगा।

यदि चालक का एक बार ओवरस्पीड, खतरनाक ढंग या फिर शराब पीकर वाहन चलाने में चालान हुआ है तो ऐसा चालक प्रतिबंधित रहेगा।

बिना योग्य परिचालक के कोई स्कूल बस का संचालन नहीं करेगा।

परिचालक की योग्यता केंद्रीय मोटरयान नियमावली के अनुसार होनी अनिवार्य।

जिन वाहन का उपयोग छात्राओं को ले जाने में होता है, उसमें महिला सहायक का होना अनिवार्य।

स्कूली वाहन निर्धारित गति पर संचालित किए जाएं। स्पीड गवर्नर अनिवार्य।

निर्धारित संख्या से अधिक छात्र बैठाना प्रतिबंधित व स्कूल बैग रखने की समुचित व्यवस्था होना अनिवार्य।

सुरक्षा के लिए बंद दरवाजा अनिवार्य। खुले दरवाजे वाले वाहन प्रतिबंधित।

चालक को बच्चों के नाम, पते, ब्लड ग्रुप, रूट प्लान व रुकने के प्वाइंट की पूरी जानकारी होना अनिवार्य।

वाहन में फर्स्ट एड बाक्स व अग्नीशमन यंत्र होना अनिवार्य।

स्कूलों में भी किया जाएगा सर्वे

बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिगत परिवहन विभाग अब स्कूलों में जाकर भी उनकी परिवहन सुविधा का सर्वे करेगा। आरटीओ ने बताया कि यह देखा जाएगा कि बच्चे स्कूल बस, वैन, निजी कैब, आटो, रिक्शा या किन साधनों से स्कूल आ रहे। इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी।

Samarth Bharat News

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