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हिंदुस्तानी भाषा काव्य प्रतिभा सम्मान से रुड़की के दो साहित्यकार विभूषित

रुड़की। हिंदुस्तानी भाषा अकादमी द्वारा तृतीय हिंदुस्तानी भाषा काव्य प्रतिभा सम्मान दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी दिल्ली में संपन्न हुआ। जिस में रुड़की से वरिष्ठ गीतकार सुरेंद्र कुमार सैनी व वरिष्ठ ग़ज़लकार कृष्ण सुकुमार को अकादमी सम्मान से नवाज़ा गया। तृतीय हिंदुस्तानी भाषा काव्य प्रतिभा सम्मान योजना के अंतर्गत देशभर से चयनित 51 दोहाकारों के दोहों का एक साझा संग्रह ‘नावक के तीर’ का लोकार्पण भी इस अवसर पर किया गया। इस साझा दोहा संग्रह में शामिल 51 दोहा कारों में रुड़की के साहित्यकार सुरेंद्र कुमार सैनी एवं कृष्ण सुकुमार के दोहों को भी चयनित किया गया तथा उन्हें सम्मानित किया गया। इस साझा दोहा संग्रह का संपादन हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष सुधाकर पाठक ने किया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉक्टर लक्ष्मी शंकर बाजपेई ने की। मंच पर विशिष्ट अतिथि साहित्यकार देवेंद्र माॅंझी उपस्थित रहे। इस आयोजन का संचालन हिंदुस्तानी अकादमी की इस योजना के समन्वयक मंडल के वरिष्ठ सदस्य विनोद पाराशर ने किया । अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के बाद दिल्ली के विभिन्न स्कूलों से आए छात्रों ,शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं ने सरस्वती वंदना, स्वागत गीत एवं हिंदी भाषा के सम्मान में गीत एवं नृत्य पेश करके आयोजन को बहुत ही सरस और रोचक बनाया । अपने उद्बोधन में हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष सुधाकर पाठक ने बताया कि यह संस्था हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं के प्रचार एवं प्रसार के लिए समर्पित है। इससे पहले वह गीतों एवं ग़ज़लों के साझा संग्रह निकाल चुके हैं तथा यह तृतीय हिंदुस्तानी भाषा काव्य प्रतिभा सम्मान हिंदी साहित्य की दोहा विधा पर दिया गया है। इस योजना के अंतर्गत देशभर के दोहाकारों से उनके द्वारा रचित 15- 15 दोहे आमंत्रित किए थे। जिनमे 237 प्रविष्टियां प्राप्त हुई जिनमे से 51 चयनित की गई। डॉक्टर लक्ष्मी शंकर वाजपेई ने बताया कि उनके पास किसी भी दोहाकार का नाम या पता नहीं भेजा गया था केवल क्रमांक एवं दोहे भेजे गए थे ,ताकि पूर्ण पारदर्शिता और दोहों के चयन का स्तर बना रहे। उन्होंने बताया कि 237 से अधिक रचनाकारों के लगभग 4000 से अधिक दोहों को पढ़ना उनके लिए एक सुखद अनुभव रहा। अच्छे, श्रेष्ठ एवं सार्थक दोहे रचने वालों की संख्या इतनी अधिक रही कि निर्णय समिति का कार्य अत्यंत चुनौती पूर्ण रहा। इतनी कठोर चयन प्रक्रिया से गुजरने के बाद रुड़की के दो साहित्यकारों का चयन इस दोहा संग्रह में होना रुड़की के लिए प्रसन्नता की बात है। देवेंद्र माॅंझी ने इस पुस्तक की भूमिका में जिन 9 सर्वश्रेष्ठ दोहों का उल्लेख किया है उनमें से एक दोहा रुड़की के साहित्यकार सुरेंद्र कुमार सैनी का भी है जो इस प्रकार है:-

रेपिस्टों का गर सखे! सत्ता करे बचाव।

फिर नारी उत्थान के, झूठे सभी सुझाव। साहित्यकारों को मंच पर बुलाकर उन्हें ‘नावक के तीर’ साझा दोहा संग्रह की एक-एक प्रति भेंट की गई तथा अंग वस्त्र व सम्मान पत्र देकर उन्हें सम्मानित किया गया। इस आयोजन में विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में रुड़की से वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. श्रीगोपाल नारसन एवं नवीन शरण निश्चल भी शामिल हुए तथा इन दोनों का हिंदुस्तान अकैडमी के अध्यक्ष सुधाकर पाठक ने आभार ज्ञापित किया।

समर्थ भारत न्यूज़

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