राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की में तीन दिवसीय 10 वीं अन्तर्राष्ट्रीय भूजल सम्मेलन 2025 का समापन हुआ।


समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. जी.सी. मिश्रा और गेस्ट ऑफ आनर प्रो. एलेक्स फरमन प्रौद्योगिकी संस्थान ईसराईल थे। निदेशक डा. एम.के. गोयल प्रो. बृजेश कुमार यादव सचिव । डा. अनुपमा शर्मा, संयोजक मंच पर उपस्थित रहे। निदेशक राजसं. रुड़की डा. एम.के. गोयल ने सम्मेलन की रिपोर्ट प्रस्तुत की उन्होंने बताया कि कुल 14 विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। 975 डेलीगेटस ने रजिस्टेªशन किया जिसमें से 400 डेली गेट्स भारत से और 25 अन्तर्राष्ट्रीय डेली गेट्स उपस्थित रहे। 41 मुख्य वक्ता रहे और 276 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए इनमें से सर्वश्रेष्ठ 41 शोध पत्रों को पुरस्कृत किया गया । इसके अतिरिक्त 3 सर्वश्रेष्ठ पोस्टर्स को भी सम्मानित किया गया। डा. अनुपमा शर्मा ने सम्मेलन की मुख्य संस्तुतियों को प्रस्तुत किया।
वर्षा जल संचय, भूजल दोहन का रेगुलेशन, जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाने की आवश्यकता है।हमें भूजल को दूषित होने से बचाने के लिए कार्य करने की आवश्यकता है । स्प्रिंग प्रबन्धन में कार्य करने की आवश्यकता है । आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए भूजल के आंकलन में सहायक हो सकती है । गहरे जलभृतों का दोहन को कम करने के उपाय करने चाहिए । मुख्य अतिथि ने अपने व्याख्यान में भूजल को रिचार्ज करने के उपायों पर विस्तृत व्याख्यान दिया तथा कहा कि अन्तराष्ट्रीय संगोष्ठी से देश एवं विदेशक के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, शिक्षाविदों, औद्योगिक क्षेत्रों एवं कृषि अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा इस तरह के आयोजन होते रहने चाहिए ।इस अवसर पर सुहास खेब्रागडे, अनुपमा शर्मा, गोपाल कृष्ण, सुमन्त सिंह, नीतिश पाटीदार, संजय कुमार, पी.सी. नायक, लक्ष्मीनारायण ठकुराल, सोबन सिंह रावत, सलीम अहमद, पवन कुमार आदि उपस्थित रहे ।









