
आज संस्कृत भारती रूड़की द्वाराद्रमुक (DMK) नेता दयानिधि मारन द्वारा भारतीय संसद में संस्कृत भाषा के प्रति व्यक्त किए गए विरोधी बयान की कड़ी निंदा करते हुए एस डी एम रुड़की को उनके कार्यालय पर ज्ञापन सौंपा गया।संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और ज्ञान-विज्ञान की धरोहर है। यह भाषा हमारी प्राचीन सभ्यता का मूल स्तंभ रही है, जिसमें वेद, उपनिषद, महाकाव्य और अनेक ग्रंथों का अमूल्य ज्ञान संचित है।


संस्कृत शिक्षण प्रमुख विष्णु गोंड ने कहा भारत जैसे बहुभाषी और सांस्कृतिक विविधता वाले राष्ट्र में किसी भी भाषा का अपमान करना केवल असंवेदनशीलता ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों को कमजोर करने का प्रयास भी है। अध्यक्षा भारती शर्मा ने कहा संस्कृत न केवल हिंदू धर्म बल्कि बौद्ध, जैन और सिख परंपराओं की भी आधारशिला रही है। इस भाषा ने विज्ञान, गणित, ज्योतिष, दर्शन और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में विश्व को अमूल्य योगदान दिया है।

जनपद मंत्री श्रद्धा हिन्दू ने कहा कि दयानिधि मारन का यह बयान न केवल संस्कृत भाषा, बल्कि भारतीय संस्कृति और इसकी समृद्ध विरासत का अपमान है। एक जनप्रतिनिधि के रूप में उन्हें सभी भाषाओं और संस्कृतियों का सम्मान करना चाहिए, न कि राजनीतिक उद्देश्यों के लिए भाषा को विवाद का विषय बनाना चाहिए। भाषा को राजनीति से दूर रखना ही देश की एकता और अखंडता के लिए हितकारी होगा।

संस्कृतभारती, रुड़की इस प्रकार की संकीर्ण मानसिकता की निंदा करती है।निंदा के लिए 25 फरवरी को जिलाधिकारी महोदय के कार्यालय में संस्कृत भारती जनपद रुड़की के पदाधिकारियों वकार्यकर्ताओं द्वारा ज्ञापन सौंपा गया। कार्य क्रम में संस्कृत भारती की अध्यक्षा डा भारती शर्मा, जनपद मंत्री श्रद्धा हिन्दू, शिक्षण प्रमुख विष्णु गौड़, नवलकिशोर पन्त, पुरूषोत्तम शर्मा, राहुल जखमोला, नितेश खन्तवाल, सतीश शर्मा आदि उपस्थित रहे।








