पूरे वर्ष रुड़की एवं आसपास के क्षेत्र की पटाखों के द्वारा सेवा करने वाले एकमात्र प्रतिष्ठान जो पटाखे बेचने के लगभग सभी मानकों को पूरा करता हो ऐसे प्रतिष्ठान चावला ट्रेडर्स को दीपावली के समय पटाखा बेचने पर क्यों प्रतिबंध लगाया गया ? क्या रुड़की शहर में गली-गली में पटाखे नहीं बिक रहे क्या किसी प्रकार की कोई रंजिश निकली जा रही है ? या किसी प्रकार का कोई लालच

है? किसके दबाव में है रुड़की शहर के प्रशासनिक अधिकारी? यह सब प्रतिबंध सनातन धर्म के त्योहार पर ही क्यों लगाए जाते हैं ? और इस प्रतिबंध से चावला ट्रेडर्स को होने वाला जो आर्थिक नुकसान है उसको कौन वहन करेगा। क्या वास्तव में प्रशासनिक

अधिकारियों द्वारा उठाया गया यह कदम न्यायोचित है।*और अंत में एक बात और कहना चाहेंगे यह वही चावला ट्रेडर्स है जहां पर प्रशासन से संबंधित चाहे वह छोटा हो या बड़ा सभी अधिकारी यहीं से पटाखे की खरीदारी करते हैं।*

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