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आदर्श शिवाजी नगर रामलीला में लक्ष्मण मेघनाथ के शक्ति बाण से हुए मूर्छित

रुड़की। आदर्श शिवाजी नगर राम लीला समिति के तत्वाधान में आयोजित प्रभु श्री रामलीला सजीव अभिनय दर्शन की दसवें दिन का लीला का उद्घाटन अतिथि कॉलोनी अध्यक्ष गौर सिंह भंडारी, रामलीला संयोजक पुष्कर सिंह तोमर , डॉक्टर धीरेंद्र सिंह रावत , सनराइज पब्लिक स्कूल राजेंद्र सिंह रावत, समाजसेवी महावीर प्रसाद डोभाल, नरेंद्र सिंह रावत ,वीरेंद्र सिंह राणा, जितेंद्र गोसाई, मुकेश भंडारी, सुनील कंडवाल, युद्धवीर सिंह जग्गी , राकेश चन्द्र थपलियाल,अमर सिंह चौहान ,सुरेंद्र सिंह शाह, प्रज्वल पन्त,राजेंद्र सिंह रावत, तरुण शर्मा, मनोज शर्मा,कीर्ति मंडल आशा नेगी बी ब्लॉक न्यू आदर्श शिवाजी नगर संयुक्त रूप से रिबन काटकर शुभारंभ किया । लीला के 10 वें दिन की लीला में, राम की सेना की तरफ से लक्ष्मण सेनापति के रूप में सेना का संचालन करते हैं तथा मेघनाथ रावण की सेना की तरफ से। दोनों में घमासान युद्ध होता है। 

लेकिन मेघनाथ शक्तिबाण का प्रयोग करते हुए, लक्ष्मण को मूर्छित कर देते हैं, यह समाचार पाकर राम बड़े व्यथित हो जाते हैं, और स्वयं को कोसने लगते हैं। 

उनकी इस व्यथा को देखकर सुग्रीव और जामवंत प्रभु राम से कहते हैं की लंका में सुसैन नामक एक बैध है। जो संभवतः लक्ष्मण की जान बचा सकते है। 

राम, हनुमान जी को सुसैन वैद्य को लाने के लिए लंका भेजते हैं। सुसैन बैध बताते है कि लक्ष्मण के प्राण केवल संजीवनी बूटी से बचाए जा सकते हैं जो कि द्रोणागिरी पर्वत पर मिलती है और अगर प्रातः काल होने से पहले वह बूटी यहां पहुंच जाए तो लक्ष्मण को बचाया जा सकता है। पुनः राम हनुमान को संजीवनी लेने द्रोणागिरी पर्वत भेजते हैं। हनुमान की समझ में नहीं आता है कि संजीवनी का कौन सा भाग ले जाया जाए। इसलिए हुए पर्वत खंड को उठाकर ले आते हैं। अयोध्या में ऊपर से आते हुए भरत जब देखते हैं की कोई वानर पर्वत को उठाकर ले जा रहा है तो उसे अपने बाण से नीचे उतार देते हैं। उन्हें जब इस बात का पता चलता है कि यह राम भक्त है और लक्ष्मण की शक्ति के लिए संजीवनी ले जा रहे हैं तो वह हनुमान से कहते हैं कि मैं तेज वेग वाले बाण से तुम्हें युद्ध स्थल भेज सकता हूं । हनुमान कहते हैं मैं स्वयं पवन पुत्र परंतु तुम लंका का एक द्वारा तोड़ दो। भरत ऐसा ही करते हैं। इस प्रकार संजीवनी आने पर लक्ष्मण के प्राण बच जाते हैं। रावण अपने भाई कुंभकरण को जो की 6 मास की निद्रा में है, जगाने हेतु अपनी सेना से कहता है और स्वयं भी उन्हें उठाने का प्रयास करता है, रावण, कुंभकरण को सारी बातें बताते हैं, और युद्ध के लिए भेजते हैं जहां वह राम के हाथों मारे जाते हैं और इसके साथ दसवें दिन की लीला संपन्न हुई। इस अवसर पर जयवीर सिंह रावत, लक्ष्मण सिंह बिष्ट, सतीश नेगी, सत्येंद्र सिंह नेगी, जय सिंह नेगी,रामचरण सिंह बिष्ट, श्याम सिंह पवांर, योगम्बर सिंह रौथाण, रविंद्र सिंह पंवार , धर्मानंद भट्ट, सतीश कुकरेती , राजेंद्र सिंह रावत, जितेंद्र ज़ख्मोला, शाकुम्बरी चौहान, उमा रावत, सरिता बिष्ट , बादल लखेड़ा, शुभम लखेड़ा , ऋतिक नेगी, दिव्यांशु थपलियाल, अभिनव बंगारी, अंशु, अदिति गुसाई, सौरभ पवार, आयुश, हर्षिता बिष्ट, रिया बिष्ट, लब्बी रावत, अंजलि रावत, पायल, सुप्रिया मेहरा, रितु लखेड़ा , अनूप, पारेशवर प्रसाद लखेड़ा, अनसूया प्रसाद जोशी, महावीर प्रसाद डोभाल , बच्चीराम कुण्डलिया, भगत सिंह रावत , बालम सिंह नेगी ,रंजीत सिंह रावत, विजय सिंह पंवार, पंचम सिंह बिष्ट, संतोषी राणा ,सुरेंद्र सिंह नेगी, जगमोहन सिंह रावत, रोहित रावत, आनंद सिंह बडथ्वाल, दरवान सिंह बुटोला ,उमराव सिंह पटवाल, बलवंत सिंह भंडारी, सतीश नेगी, कुंदन सिंह नेगी, राजेंद्र सिंह रावत, सुनील नेगी, गणेश खंडूरी,रामेश्वरी पवार, विशम्बरी बिष्ट , गायत्री बुमला, शिवचरण बिंजोला, सुरेंद्र सिंह पवार ,दिनेश सिंह चौधरी, विनीत भारद्वाज आदि राम भक्त उपस्थित थे।

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