
आपने कभी फिल्मों देखा होगा कि हीरो और शेर के बीच हाथापाई हुई और हीरो ने उसे मार डाला, या फिर कभी किसी राजा महाराजा के बारे में पढ़ा या सुना होगा कि उन्होंने कैसे शेर या बाघ से दो-दो हाथ किए और उसे मौत के घाट उतार दिया, लेकिन अब जो हम आपको बताने जा रहे हैं, वो न कोई फिल्मी कहानी है और न ही किसी इतिहास का किस्सा, बल्कि वो एक सच्ची घटना है।इस असल कहानी के रियल हीरो हैं 55 साल के रिटायर फौजी तेगवीर नेगी, जो न सिर्फ तेंदुए से भिड़ गए, बल्कि उसे जान से भी मार डाला।
जिन लोगों ने UP के बिजनौर के भिक्कावाला गांव के पूर्व सैनिक तेगवीर सिंह नेगी और एक आदमखोर तेंदुए के बीच की उस भयानक लड़ाई को देखा, उन्होंने इसे ‘जिंदगी या मौत की लड़ाई’ बताया। सात मिनट की इस नाटकीय लड़ाई में, 55 साल के पूर्व सैनिक ने बहादुरी से एक तेंदुए से मुकाबला किया, जिसने उन पर तब हमला किया, जब वह अपने खेत में काम कर रहे थे।

जंगली जानवर ने उन्हें खींचा, लेकिन तेगवीर ने केवल एक छड़ी और अपने हाथों की मदद से पूरे साहस के साथ उसका मुकाबला किया। आखिरकार तेंदुए की मौत के साथ ये संघर्ष तो खत्म हो गया, लेकिन तेगवीर गंभीर रूप से घायल हो गए।
‘खूब लड़ा अपना तेगवीर’
भिक्कावाला गांव के ही रहने वाले और इस लड़ाई को अपनी आंखों से देखने वाले सुरजन सिंह ने इसे “जिंदगी की जंग” बताया। उन्होंने कहा, “खूब लड़ा अपना तेगवीर, आखिर तक लड़ता रहा और हार नहीं मानी।”
सुरजन ने याद किया कि कैसे एक घातक तेंदुए के हमले के सामने तेगवीर की अटूट हिम्मत और साहस ने सभी को हैरान कर दिया था। अपनी गंभीर चोटों के बावजूद, तेगवीर ने तेंदुए के दम तोड़ने तक जमकर संघर्ष किया।
रोंगटे खड़े कर देने वाली लड़ाई
रोंगटे खड़े कर देने वाली यह घटना बुधवार देर शाम सामने आई, जब 55 साल के पूर्व सैनिक तेगवीर नेगी, बिजनौर के अफजलगढ़ पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले भिक्कावाला गांव में अपने खेत में काम कर रहे थे।
एक बड़ा तेंदुआ, जिसका वजन 90 से 120 किलोग्राम के बीच था, पास के जंगल से निकला और नेगी पर पीछे से अचानक हमला कर दिया। तेंदुए ने अपने बड़े और नुकीले दांत उनकी गर्द और गले में गहराई तक गढ़ा दिए, जिससे वह उसकी पकड़ में आ गए। हालांकि, अचानक हुए इस हमले और जानलेवा दर्द के बावजूद, नेगी के अंदर का सैनिक जाग उठा और उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया।
अब हमला करने की बारी नेगी की थी और उन्होंने अपने खाली हाथों से ही जवाबी अटैक करने का सोचा और तेंदुए के चेहरे पर मुक्का मारना शुरू कर दिया, यही तेंदुए का सबसे कमजोर हिस्सा होता।तेंदुआ लगातार उन्हें झाड़ियों में खींचने की कोशिश करता रहा, लेकिन बहुत ज्यादा खून बह जाने के बावजूद नेगी लगातार उसके चेहरे पर हमला करते रहे। इससे जानवर भ्रमित तो हो गया, लेकिन उसने अपने शिकार पर पकड़ बनाए रखी।
इस लड़ाई को देखने वाले स्थानीय लोगों ने बताया, “भयंकर संघर्ष के बीच, जब तेंदुआ तेगवीर को झाड़ियों में खींच रहा था, तभी नेगी के हाथ एक छड़ी लग गई और फिर उसे उन्होंने अपना हथियार बना लिया।”
उन्होंने आगे बताया कि नेगी अब इस छड़ी से ही तेंदुए के चेहरे और गर्दन पर बार-बार लगातार वार करते रहे, जिससे जानवर की पकड़ कमजोर हो गई। बस फिर क्या था, तेंदुए की गर्दन पर आखिर वार करके नेगी ने उसे जमीन पर गिरा दिया और तब तक जानवर दम तोड़ चुका थ।
हालांकि, जिंदगी और मौत की जंग में तेगवीर नेगी को गंभीर चोटें आईं। उन्हें काशीपुर के प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर बताई। उनके शरीर पर तेंदुए के पंजों और दांतों के गहरे घाव थे, जिससे काफी खून बहने से उनकी हालत नाजुक हो गई थी।इस जानकारी मिलने पर वन विभाग और स्थानीय पुलिस की एक टीम तेंदुए के शव को कब्जे में लेने के लिए घटनास्थल पर पहुंची। हालांकि, टीम को गांव वाले के गुस्से का सामना करना पड़ा, जिन्होंने तेंदुओं को पकड़ने में विभाग की विफलता पर नाराजगी जताई। लोगों ने नारे लगाए और वन विभाग के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। क्योंकि इस इलाके में तेंदुए का खतरा बहुत ज्यादा है।
बिजनौर के DFO जीएम गंगवार ने बताया कि तेंदुआ लगभग 4 से 5 साल का था।
500 तेंदुओं का घर है बिजनौर!
तेगवीर का गांव, भिक्कावाला, बिजनौर के तेंदुए से प्रभावित इलाके में है। यहां के बारे में वन विभाग का कहना है कि यह लगभग 500 तेंदुओं का घर है, जिनमें नरभक्षी भी शामिल हैं, जो इलाके के लोगों को अपना शिकार बना लेते हैं।
इस इलाके में रहने वाले लगभग 60,000 लोग घर के अंदर रहने को मजबूर हैं, क्योंकि पिछले डेढ़ साल में नरभक्षी तेंदुओं ने 26 लोगों की जान ले ली है।उत्तर प्रदेश वन विभाग की कोशिशों के बावजूद स्थिति गंभीर बनी हुई है। विभाग ने लगभग 107 पिंजरे लगाए हैं और 65 तेंदुओं को पकड़ा है, जबकि 36 अलग-अलग घटनाओं में मारे गए हैं।






