
सुसाइड कैप्सूल इस समय पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। जो लोग अपनी जान देना चाहते हैं, यह मशीन इसी काम में उनकी मदद करती है। बीते दिनों स्विट्जरलैंड में पहली बार इसका इस्तेमाल किया गया था जब अमेरिका की एक महिला ने सुसाइड कैप्सूल के जरिए अपनी जान दे दी थी।मामले में कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है। इस मशीन को बनाने वाले डॉ. फिलिप नित्श्के, जिन्हें ‘डॉक्टर डेथ’ नाम दिया गया है, ने बताया है कि कैप्सूल के अंदर जाने वाले शख्स को 8 शब्दों का एक मैसेज सुनाई देता है। आइए जानते हैं यह मशीन कैसे काम करती है और इसमें सुनाई देने वाला यह मैसेज क्या है।
कैसे काम करता है कैप्सूल?

अमेरिका की जिस महिला ने सुसाइड कैप्सूल में अपनी जान दी थी वह गंभीर इम्यून कॉम्प्रोमाइज की समस्या का सामना कर रही थी। सारको पॉड या फिर सुसाइ़ड कैप्सूल को इस तरह से बनाया गया है कि इसका इस्तेमाल करने वाला शख्स इसमें आराम से लेट सके। इसके बाद उसे एक बटन दबाना होता है जो कैप्सूल के अंदर ही होता है। यह बटन दबाने के तुरंद बाद सील्ड चैंबर के अंदर नाइट्रोजन गैस रिलीज होने लगती है। जानकारी के अनुसार इसके 2 मिनट बाद शख्स बेहोश हो जाता है और 5 से 10 मिनट के अंदर-अंदर उसकी मौत हो जाती है। लेकिन इस बटन को दबाने से पहले यूजर को आठ शब्द का एक मैसेज सुनाई देता है।अंदर सुनाई देता है ये मैसेज
3-डी प्रिंटर से बनाए गए इस सुसाइड कैप्सूल में जाने वाले यूजर्स को जो मैसेज सुनाई देता है वह है ‘इफ यू वांट टू डाई, प्रेस दिस बटन’ यानी अगर आप मरना चाहते हैं तो यह बटन दबाइए। बटन दबाने के बाद प्रक्रिया शुरू हो जाती है। अगर किसी को बटन दबाने में समस्या होती है तो प्रोसेस को वॉइस कंट्रोल और आई मूवमेंट से भी शुरू किया जा सकता है। लेकिन, एक बार शुरू होने के बाद इस प्रोसेस को न तो रोका जा सकता है और न ही रिवर्स किया जा सकता है। बता दें कि इस सुसाइड कैप्सूल का निर्माण नीदरलैंड्स की कंपनी एग्जिट इंटरनेशनल ने किया है। बता दें कि स्विट्जरलैंड समेत कुछ देशों में असिस्टेड सुसाइड को लीगल है।






