
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश को अपराधमुक्त बनाने की दिशा में लगातार कई अहम कदम उठा रही है। सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदम के सकारात्मक परिणाम भी स्पष्ट तौर पर देखने को मिल रहे हैं।प्रदेश में संगठित अपराध लगभग खत्म हो चुका है। जिस तरह से प्रदेश में प्रशासन की ओर से अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उसने अपराधियों की कमर को तोड़कर रख दिया है।

सरकार ना सिर्फ अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है बल्कि उन्हें सजा दिलाने के लिए भी पुख्ता रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। पिछले साल 1 जनवरी को योगी सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ अभियान को लगातार सफलता मिल रही है। 13 महीने की अवधि में कड़ी पैरवी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के माध्यम से 50 हजार से अधिक अपराधियों को दोषी करार दिया गया। इस पहल का उद्देश्य अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलाना था।

‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के प्रमुख फोकस क्षेत्र

अभियान को कारगर बनाने के लिए डीजीपी प्रशांत कुमार ने प्रतिदिन इसकी निगरानी की। सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए एडीजी क्राइम को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया। अभियान में माफिया गतिविधियों, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध और हत्या, डकैती और धर्म परिवर्तन जैसे अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी गई।एडीजी क्राइम की देखरेख में ‘जांच, अभियोजन और दोषसिद्धि’ नामक एक समर्पित पोर्टल का इस्तेमाल किया गया। अभियान की प्रभावशीलता को ट्रैक करने के लिए जिलों ने इस पोर्टल पर दैनिक प्रगति दर्ज की। इस पहल का उद्देश्य यह है कि किसी भी मामले की अनदेखी ना हो।
अभियान के महत्वपूर्ण परिणाम
पिछे 13 महीनों में 87 माफियाओं को सजा सुनाई गई, जिनमें से 44 को मौत की सजा मिली। इसके अलावा, POCSO-महिला सुरक्षा मामलों में शामिल 6,944 अपराधियों और हत्या और डकैती जैसे सनसनीखेज अपराधों से जुड़े 15,541 व्यक्तियों को दोषी ठहराया गया। इसके अलावा, अन्य अपराधों में शामिल 27,438 अपराधियों को सजा हुई है।
1 जुलाई 2023 से 9 सितंबर 2024 के बीच कुल 72,815 मामले सामने आए। इनमें से 36,375 आरोपी दोषी पाए गए। केवल 2,653 मामलों में ही आरोपी बरी हुए। अदालतें इन मामलों की सुनवाई औसतन 334 दिनों में करने में सफल रहीं।दैनिक निगरानी और प्रभावी वकालत
डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि हर महीने माफिया गतिविधियों और महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से जुड़े बीस-बीस मामलों की पहचान की जाती है। समय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए इन मामलों को प्राथमिकता दी जाती है। अभियान की सफलता का श्रेय संदिग्धों को जल्दी से जल्दी गिरफ्तार करने के अथक प्रयासों को जाता है।
इस अभियान के दौरान अदालत में प्रतिदिन औसतन लगभग 150 मामलों की सुनवाई हुई। यह दक्षता न्याय को शीघ्रता और प्रभावी ढंग से प्रदान करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
इस पहल से न केवल अनेक अपराधियों को न्याय के दायरे में लाया गया है, बल्कि कड़े उपायों के माध्यम से कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य की प्रतिबद्धता को भी मजबूती मिली है।





























