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राष्ट्रीय कवि सम्मेलन, गुरु पूर्णिमा पर हुआ आयोजित।

 राष्ट्रीय कवि सम्मेलन, गुरु पूर्णिमा पर हुआ आयोजित।गुरु अंधकार को मिटाकर।उजाला जीवन में करते।। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर नगर स्थित जीवनदीप आश्रम में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया ,जिसका शुभारंभ महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरि जी महाराज ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर किया ।कवि सम्मेलन की अध्यक्षता व्यापार मंडल के अध्यक्ष अरविंद कश्यप ने की तथा संचालन वीर रस के जाने-माने कवि किसलय क्रांतिकारी ने किया ।कवि सम्मेलन में अनेक शहरों से आए कवियों ने अपनी अपनी कविताओं से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया सहारनपुर से आए प्रसिद्ध गीतकार नरेंद्र मस्ताना ने काव्य पाठ करते हुए पढ़ा कि गुरुदेव आप की चरण धूल पारस का काम करें, जीवन को ज्योतिर्मय कर दे, मन का संताप हरे ।देहरादून से पधारी प्रसिद्ध कवित्री एवं एंकर रितिका थपलियाल ने पढ़ा ,विनय अनुनय दया से तुम चमन के मान हो जाना। लिखा जाए किताबों में अमर गुणगान हो जाना ।रचा इतिहास ऐसा जिसका हर पन्ना सुनहरा हो ।लुटा कर जान माटी पर वतन के शान हो जाना। इन पंक्तियों पर कवि सम्मेलन में भारत माता की जय, वंदे मातरम के नारों से आकाश गुंजायमान हो गया। प्रकृति के कवि राम कुमार चौहान चौहान ने पढ़ा अत्याचार की पराकाष्ठा पानी सर से पार हुआ ।क्षमा न होंगे कातिल भगवे के ,राक्षसी दुस्साहस हुआ ।देश के जाने माने प्रसिद्ध कवि डॉ आर पी सारस्वत जो मथुरा से पधारे थे ,उन्होंने पढ़ा ,पूछो परवाने से क्या सुख मिलता है ,जल जल मर जाने से ।दर्पण से डरता हूं ,सच सच बात कहूं, मैं सच से डरता हूं ।प्रसिद्ध कवि डॉक्टर विनय प्रताप सिंह ने पढ़ा, हिंदी ,हिंदू हिंदुस्तान ,सबका प्यारा हिंदुस्तान ।जान लुटा कर इस पर हम करें पूरा अभिमान। इस कविता पर श्रोताओं से विनय प्रताप ने खूब तारीफ बटोरी ।वीर रस के जाने-माने प्रसिद्ध कवि किसलय क्रांतिकारी ने पढ़ा ,मैं पूज्य गुरुदेव का सदा सम्मान करता हूं ।उनके पावन चरणों में सदा प्रणाम करता हूं ।मुझे परवाह नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की ।तिरंगा हो कफन मेरा यही अरमान रखता हूं। इस अवसर पर देश के कोने-कोने से आए गुरु पूर्णिमा में भाग लेने हेतु अनेक श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में कवि सम्मेलन का आनंद उठाया ।इस अवसर पर महामंडलेश्वर यतींद्र आनंद गिरि जी महाराज ने बोलते हुए कहा की कवियों ने देश की आजादी से लेकर आज तक देश के अंदर अपनी कविताओं के माध्यम से अनेक रचनात्मक कार्य किए हैं ।कवियों ने इस देश को हमेशा दिशा दी है ।माता जानकी को आश्रय देने वाले भी इस विश्व के प्रथम कवि पूज्य वाल्मीकि जी ही थे ।इस अवसर पर बड़ी संख्या में मातृशक्ति और बच्चे भी उपस्थित रहे सम्मेलन में आयोजन समिति के अध्यक्ष मनोज गोयल , महासचिव ब्रज मोहन सैनी ,कोषाध्यक्ष महेंद्र सैनी ,तथा समन्वयक प्रवीण सब्बरवाल ने सभी कवियों का माला पहनाकर शॉल उड़ाकर पुष्प कुछ भेंट कर भव्य स्वागत किया ।इस अवसर पर के पी सिंह, सुदर्शना सैनी ,प्रवेश धीमान, डॉक्टर बृजपाल धीमान, तेजपाल तेज ,पवन कुमार, अंग्रेज पाल ,अमित कुमार, क्रांति सैनी ,वरुण कुमार विजय सैनी ,सुधा शर्मा , टेक बल्लभ ,श्यामवीर सैनी, अरविंद सैनी ,देशराज कर्नवाल,प्रभात चौधरी ,आदि उपस्थित रहे ।कवि सम्मेलन देर रात तक चला।

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