
रुड़की। नवरात्रों के पावन समापन के अवसर पर पंचशील काली माता मंदिर में सतचंडी यज्ञ के उपरांत भव्य हवन पूजन का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ किया गया। इस विशेष अवसर पर मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर नजर आया, जहां दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने हवन में भाग लेकर माँ भगवती का आशीर्वाद प्राप्त किया।हवन पूजन का शुभारंभ विधि-विधान के साथ वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हुआ। विद्वान आचार्यों और पंडितों ने पूरे नियम और शास्त्रों के अनुसार हवन संपन्न कराया। यज्ञ कुंड में आहुति देते समय “स्वाहा” के जयघोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना करते हुए आहुतियां अर्पित कीं।सतचंडी यज्ञ, जो माँ दुर्गा की आराधना का अत्यंत प्रभावशाली अनुष्ठान माना जाता है, के पूर्ण होने के बाद यह हवन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। मंदिर के महंत एवं आयोजकों ने बताया कि नवरात्रि के नौ दिनों तक चलने वाले पूजन, पाठ और यज्ञ के बाद हवन के माध्यम से समस्त अनुष्ठानों की पूर्णाहुति दी गई।कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। भजन-कीर्तन और माँ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया।हवन के उपरांत श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान भक्तों के चेहरे पर संतोष और आस्था की झलक साफ दिखाई दी। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और भाईचारे की भावना को बल मिलता है।इस भव्य हवन पूजन के साथ ही नवरात्रि पर्व का समापन अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ।






