
रुड़की।राजेंद्र नगर स्थित श्री बालाजी गार्डन में भव्य श्री शिव महापुराण के पंचम दिवस की कथा में शिव-पार्वती विवाह बड़े ही धूमधाम से मनाया गया,जिसमें कथा व्यास आचार्य गणेश नौटियाल ने शिव महापुराण की अद्भुत महिमा का गुणगान किया।भगवान शंकर की महिमा का गुणगान करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शंकर के जीवन चरित्र से ज्ञान,विवेक,सहनशीलता,प्रेम,समर्पण,त्याग,संतुष्टि और संस्कारों की भावना हमारे अंदर जागृत होती है।माता पार्वती के जीवन चरित्र से हमें यह सीखने को प्राप्त होता है कि बेटी हमारे घर कुछ लेनी नहीं आती,बल्कि हमें कुछ देनी आती है।सदा अचल एहि कर अहिवाता एहि ते जसु पहहि पितु माता।बेटी को यदि हम अच्छे संस्कार देंगे तो जब वह विवाह के बाद दूसरों के घर जाती है तो वहां वह हमारा यश बढाती है,जो हम करोड़ों रुपए में से भी नहीं खरीद सकते।सुचारू रूप से सुवस्थित ढंग से बेटी वहां का कार्य संभालती है।दूसरों की सेवा करती है तो तब हमारा यश फैलता है।माता-पिता का यश फैलता है।हम मानव सोचते हैं यदि किसी को बेटे की प्राप्ति होती है तो बेटा जब बड़ा होगा,तब इसका विवाह होगा।विवाह होगा तो बहू आएगी।बहू आएगी तो खूब सारा धन भी आएगा।जब बेटी का जन्म होता है तो हम सोचते हैं कि जब यह बड़ी होगी तो इसका विवाह होगा।विवाह होगा तो इसको कुछ दहेज भी देना पड़ेगा लेकिन बेटी लेनी नहीं देनी आती है।कथा में आशीर्वाद लेने पहुंचे पूर्व मेयर गौरव गोयल ने शिव महापुराण कथा की महिमा का वर्णन किया।इस अवसर पर आशा धस्माना,सुनीता सैनी,तुषार धीमान,राजकुमार, आचार्य दिनेश,आचार्य दिवाकर,शकुंतला बिष्ट,मांगेराम सैनी,राजकुमारी आदि अनेक भक्तजन मौजूद रहे।




























