

सालियर रुड़की के शिक्षक रविन्द्र ममगाई को उत्तराखण्ड गौरव रत्न सम्मान मिला।
विधान सभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी, कला व संस्कृति राज्य मंत्री मधु भट्ट एवं शिक्षविद् सुमन ध्यानी के कर कमलों से आज देहरादून में डिस्कवर उत्तराखण्ड 24 न्यूज़ के बैनर तले चीफ एडिटर अम्बेश पंत के संयोजन में उत्तराखण्ड गौरव रत्न सम्मान दिया गया।
रविन्द्र ममगाई को शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिये दिया गया है। रविन्द्र ममगाई अंग्रेज़ी के अध्यापक हैं। वे तीनो विषयो में परास्नातक व पीजी डिप्लोमा एन मॉस कम्यूनिकेशन में परास्नातक हैं। सन् 2005 से अध्यापकी कर रहे हैं। राजकीय इण्टर कॉलेज, बंगियाल, गैण्डीखाता,0मुन्नाखाल और अब सालियर के हाई स्कूल में सेवाएं दे रहे हैं। ममगाई जी शीतावकाश शग्रीष्मवकाश व अन्य अवकाशो में विभिन परीक्षाओं की तैयारी करवाते है। न केवल शिक्षा के क्षेत्र वरन पर्यावरणीय गतिविधियाँ व संवर्धन के कार्यक्रम समय पर करते रहते है। विद्यार्थियों के कैरियर गाईडेस व अन्य संस्थानो में प्रवेश व छात्र वृत्तियों के लिये मार्गदर्शन भी करते है। बेटी बचाओ बेटी पढाओं के लिये समाज में जागृति अभियान चलाते है तथा ग्रामीणो के घर घर जाकर विद्यालय के बाद जाकर समझाते है। इस वर्ष 16 बालिकाओं का प्रवेश रुड़की में उन्हांने करवाया । समय समय पर कामायाब महिलाओं नेत्रियो को विद्यालय में बुलाकर सम्मान व बौधिक कार्यक्रम आयोजित कर बालिकाओ को प्रेरणा देने का कार्य भी करते रहे हैं। रविन्द्र ममगाई जैसे हजारों शिक्षक हैं जो शिक्षा की अलख जगाए हुए हैं। चुपचाप बगैर किसी सम्मान-पुरस्कार की चाह में अपने स्तर पर कुछ हटकर काम करते रहते हैं।
रविन्द्र ममगाई उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन कारी हैं। नौकरी में आने से पूर्व वे घर पर ट्यूटर के तौर पर अच्छी-खासी प्रतियोगिताओं में रुड़की के युवाओं को तैयारी कराते थे। राज्य की पहली सब इंस्पेक्टर परीक्षा में उनके द्वारा कराई गई तैयारी में कई युवा-युवतियाँ आज इंस्पेक्टर हैं। बहरहाल, एक-लंबी चौड़ी फेहरिस्त है जो उनके उत्साह का प्रदर्शित करती है।
शैक्षिक भ्रमण, अतिरिक्त कक्षाएं, अवकाश के दिनों में बहुआयामी कार्यशालाएँ, चुपचाप निर्धन छात्रों की आर्थिक सहायता हो, वह आगे रहते हैं। विद्यालयी संसाधनों में निजी स्तर पर भी सहयोग करते रहे हैं। ज़ाहिर-सी बात है कि धारा के विपरीत हस्तक्षेप करना और लीक से हटकर कुछ करने वालों की राह आसान नहीं होती। निन्दा और कुप्रचार भी साथ चलता है लेकिन समय के साथ-साथ लक्ष्य-मन्तव्य और छात्र हित सभी को दिखाई ही दे जाता है। इस प्रकार के सम्मान कईयों का हौसला भी बढ़ता है और सैकड़ो शिक्षक और बेहतर करने की दिशा में अग्रसर होते हैं। वे शिक्षा का मूल उद्देश्य अतिम पायदान में बैठे व्यक्ति को शिक्षित करना मानते है और आशा करते है सार्थक परिणाम समाज को बेहतर बनायेगा ।